पंडित गौरव कुमार दीक्षित कहते हैं कि क्या आप जानते हैं कि रोटी बनाते समय की आपकी कुछ छोटी आदतें घर की सुख-शांति से जुड़ी हो सकती हैं? वास्तु शास्त्र में ऐसा माना जाता है कि रसोई और वहां बनने वाला भोजन घर के माहौल पर असर डालता है. इसी वजह से रोटी बनाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. वास्तु के अनुसार रोटियां गिनकर बनाना, बासी आटे का इस्तेमाल करना या कुछ जरूरी नियमों को नजरअंदाज करना शुभ नहीं माना जाता. आइए जानते हैं रोटी बनाने से जुड़े ऐसे ही कुछ वास्तु नियमों के बारे में.
रोटियां गिनकर बनाना क्यों माना जाता है गलत
वास्तु मान्यताओं के अनुसार रोटियां गिनकर बनाना शुभ नहीं माना जाता. कहा जाता है कि ऐसा करना सूर्य देव का अपमान माना जाता है, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं. मान्यता ये भी है कि नौकरी और कारोबार में रुकावटें आ सकती हैं. इसलिए रोटियां हमेशा जरूरत से थोड़ी अधिक बनानी चाहिए ताकि कोई मेहमान या जरूरतमंद भूखा न रहे.
पहली और आखिरी रोटी का महत्व
भारतीय परंपरा में पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा रही है. वास्तु शास्त्र में भी इसे शुभ माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. अगर आसपास गाय न हो तो पहली रोटी किसी जरूरतमंद को देना भी अच्छा माना जाता है.
बासी आटे से बचने की सलाह
वास्तु के अनुसार रोटियों के लिए हमेशा ताजा आटा गूंथना बेहतर माना जाता है. मान्यता है कि बासी आटा नकारात्मकता को बढ़ाता है. इसलिए बचे हुए आटे का अगले दिन इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है. कहा जाता है कि इससे घर में तनाव और आर्थिक परेशानियों की आशंका कम रहती है.
चूल्हे की दिशा भी मानी जाती है अहम
वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई का चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है. वहीं रोटी बनाते समय मुख पूर्व दिशा की ओर रखना अच्छा माना जाता है. मान्यता है कि इससे भोजन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सदस्यों का मानसिक संतुलन बेहतर रहता है. रात में तवा या कड़ाही जूठी छोड़ना वास्तु के अनुसार ठीक नहीं माना जाता. इन्हें साफ करके सूखी जगह पर रखना चाहिए. वहीं चकला-बेलन को भी हमेशा साफ-सुथरा रखने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि रसोई की साफ-सफाई घर के सुख और शांति से जुड़ी होती है.
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