कार्तिक मास हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, दीपदान, स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है. लेकिन, कार्तिक मास शुरू होते ही भक्तों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं. क्या ठंडे पानी से ही स्नान करना जरूरी है? अगर व्रत न रख पाएं तो क्या पूजा का फल मिलेगा? और पूरे महीने ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी है? धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में स्नान-दान और पूजन करना बहुत अच्छा और लाभदायक माना जाता है. चलिए आपको बताते हैं कार्तिक मास व्रत रखना जरूरी है और कार्तिक के महीने में क्या करें और क्या नहीं?
कार्तिक महीना कब से शुरू
पंचांग के अनुसार, 26 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 9 बजकर 42 मिनट तक आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि रहेगी और इसके बाद कार्तिक मास का आरंभ हो जाएगा, लेकिन उदया तिथि की गणना के अनुसार 27 अक्टूबर को कार्तिक मास का व्रत और मेला आरंभ हो जाएगा. इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा के दिन यानी 24 नवंबर, मंगलवार के दिन कार्तिक महीने का समापन होगा.
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कार्तिक मास का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है. इस महीने में स्नान, दान, दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है. इस दौरान सर्योदय से पहले स्नान कर भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है.
कार्तिक में क्या गर्म पानी से स्नान कर सकते हैं?
बहुत से लोग ठंड के कारण कार्तिक स्नान को लेकर चिंता में रहते हैं. ऐसा नहीं है कि कार्तिक महीने में सिर्फ ठंडे पानी से नहाना चाहिए. अगर, ठंडे पानी से स्नान करने पर हेल्त खराब होने का डर हो या डॉक्टर ने मना किया हो, तो गुनगुने या गर्म पानी से स्नान किया जा सकता है. क्योंकि भक्ति करने के लिए हेल्दी रहना भी बहुत जरूरी है.
क्या नदी में स्नान जरूरी है?
कार्तिक मास में गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है, लेकिन हर किसी के लिए गंगा या फिर अन्य किसी पवित्र नदी के पास जाना संभव नहीं होता. ऐसे में घर पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से भी धार्मिक लाभ प्राप्त होने की मान्यता है.
क्या कार्तिक मास में व्रत रखना जरूरी है?
कार्तिक स्नान और व्रत दो अलग-अलग नियम हैं. अगर, कोई व्यक्ति पूरे महीने व्रत नहीं रख सकता, तब भी वह कार्तिक स्नान, पूजा, दीपदान और मंत्र जाप कर सकता है. श्रद्धा के साथ की गई भक्ति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है.
कार्तिक मास में क्या करें?
कार्तिक के महीने में रोज सुबह जल्दी उठें, स्नान करें, भगवान विष्णु का स्मरण करें, तुलसी के पास दीप जलाएं और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करें. इसके अलावा मंत्र जाप और कथा सुनें.
कार्तिक मास में क्या नहीं करें?
कार्तिक के महीने मांस, मदिरा, अंडा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए, कार्तिक मास में शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए, इस पूरे महीने में ब्रह्मचर्य नियमों का पालन करना चाहिए, रविवार को तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना और इस पूरे महीने मन और वाणी में संयम रखें, कम बोलें और वाद-विवाद से दूर रहें.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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