ज्योतिष गणना के अनुसार हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत पर जो भी व्यक्ति विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा करता है उसके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और समस्याओं से छुटकारा मिलता है. जून का महीना शुरू हो चुका है और इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस महीने में पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा. आइए जानते हैं सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.
जून में कब है पहला प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून को शाम 7 बजकर 36 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर होगा. ऐसे में जून का पहला प्रदोष व्रत 12 जून को रखा जाएगा. ये व्रत शुक्रवार के दिन पड़ेगा जिसके चलते ये शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा.
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसे में 12 जून को प्रदोष काल शाम को 07 बजकर 36 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. सभी भक्त इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.
पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह नहा कर पूजा करें और फिर दिन भर फलाहार का सेवन करें या तो उपवास रखें.
- शाम के समय में आप शिव जी के मंदिर जाए या फिर आपके घर में अगर शिवलिंग है, तो उसपर अभिषेक करें.
- भगवान शिव को जल, दूध, शहद, गंगाजल, बेलपत्र और सफेद पुष्प चढ़ाएं.
- इसके बाद शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या प्रदोष व्रत कथा करें.
शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन पड़ने वाले शुक्र प्रदोष व्रत पर विधि-विधान से पूजा करने से साधक पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. साथ ही सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके अलावा शुक्र प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति के जीवन हमेशा धन-संपदा बनी रहती है और वह सुखी वैवाहिक जीवन जीता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.











