आज 3 जून, बुधवार को विभुवन संकष्टी चतुर्थी का पावन अवसर है, जो गणपति बप्पा की उपासना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब संकष्टी चतुर्थी अधिक मास में आती है, तब उसे विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और इसका पुण्य फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक होता है. आज के दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, सफलता तथा संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं. माना जाता है कि विघ्नहर्ता गणेश अपने भक्तों की मनोकामनाएं सुनते हैं और उनके जीवन से नकारात्मकता तथा बाधाओं को दूर करते हैं.
धार्मिक ग्रंथों में पूजा के साथ आरती का भी विशेष महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि आरती के बिना किसी भी देवी-देवता की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती. आरती के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण व्यक्त करते हैं. ऐसे में अगर आप भी आज विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा कर रहे हैं, तो पूजा के बाद गणपति बप्पा की आरती अवश्य करें. इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदन्त, दयावन्त, चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूषक की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डूवन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शम्भु सुतवारी।
कामना को पूरा करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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