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Durga Saptashati: क्या है दुर्गा सप्तशती और नवरात्र में क्यों किया जाता है इसका पाठ? जानें 13 अध्यायों का महत्व

Durga Saptashati: दुर्गा सप्तशती मार्कण्डेय पुराण का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें 13 अध्याय और मां दुर्गा की महिमा का वर्णन है. नवरात्र में इसका पाठ करने की परंपरा है. जानें इसके अध्यायों का महत्व और पाठ की विधि.

Durga Saptashati: क्या है दुर्गा सप्तशती और नवरात्र में क्यों किया जाता है इसका पाठ? जानें 13 अध्यायों का महत्व
मार्कण्डेय पुराण का महत्वपूर्ण हिस्सा है दुर्गा सप्तशती
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शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ दुर्गा सप्तशती के पाठ का भी विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस ग्रंथ का पाठ करने से भक्त मां भगवती की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं. दुर्गा सप्तशती में देवी के अलग-अलग स्वरूपों, असुरों के साथ उनके युद्ध और देवताओं द्वारा की गई स्तुति का वर्णन मिलता है. इसमें राजा सुरथ और समाधि वैश्य की कथा भी शामिल है. मान्यता है कि देवी की आराधना से सांसारिक सुख, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है. आचार्य मदन मोहन से आइए जानते हैं कि दुर्गा सप्तशती क्या है, इसके कितने अध्याय हैं और नवरात्र में इसका पाठ क्यों किया जाता है.

क्या है दुर्गा सप्तशती?

आचार्य मदन मोहन के अनुसार, दुर्गा सप्तशती मार्कण्डेय पुराण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसमें कुल 13 अध्याय हैं और परंपरागत रूप से 700 श्लोकों का संकलन माना जाता है. इस ग्रंथ में मां दुर्गा की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ जैसे असुरों के वध का वर्णन मिलता है. दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक का पाठ करने की भी परंपरा है.

नवरात्र में क्यों किया जाता है दुर्गा सप्तशती का पाठ

नवरात्र को मां दुर्गा की उपासना का विशेष समय माना जाता है. इन नौ दिनों में भक्त पूजा, व्रत, मंत्र जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की आराधना से साहस, शक्ति, ज्ञान और सुख-समृद्धि की कामना की जााती है. हालांकि, ये धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यताएं हैं.

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दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों में क्या है

दुर्गा सप्तशती के पहले अध्याय में मधु-कैटभ वध का प्रसंग है. दूसरे और तीसरे अध्याय में देवी के प्राकट्य और महिषासुर के वध का वर्णन मिलता है. चौथे अध्याय में देवताओं द्वारा देवी की स्तुति की गई है. पांचवें अध्याय में देवी की स्तुति और शुम्भ द्वारा दूत भेजने का प्रसंग है. छठे अध्याय में धूम्रलोचन, सातवें में चंड-मुंड और आठवें में रक्तबीज के वध का वर्णन है. नौवें अध्याय में निशुम्भ और दसवें में शुम्भ के वध की कथा आती है. ग्यारहवें अध्याय में देवताओं की स्तुति और देवी के वरदान काा वर्णन है. बारहवें अध्याय में देवी के चरित्र के पाठ का माहात्म्य बताया गया है, जबकि तेरहवें अध्याय में राजा सुरथ और समाधि वैश्य को देवी से वरदान मिलने की कथाा है.

दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें?

परंपरा के अनुसार, पाठ से पहले स्नान करके स्वच्छ स्थान पर मां दुर्गा की पूजा की जाती है. श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पाठ कर सकते हैं. संपूर्ण पाठ करने की विधि अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती है, इसलिए सही विधि जानने के लिए किसी जानकार आचार्य से मार्गदर्शन लेनाा उचित है.

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