सूतक काल क्या होता है? जानें कितने घंटे पहले लगता है और क्यों माना जाता है इसे महत्वपूर्ण

What is Sutak Kaal in Chandra Grahan: जैसे ही ग्रहण की चर्चा होती है, सूतक काल को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं. आज सुबह 6:23 बजे से सूतक काल शुरू हो चुका है. हालांकि, कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर सूतक काल होता क्या है, यह कितने समय का होता है और इसे क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं इन सभी सवालों का जवाब-

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What is Sutak Kaal in Grahan: सूतक काल क्या होता है?

What is Sutak Kaal in Chandra Grahan: आज यानी 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है. अब, जैसे ही ग्रहण की चर्चा होती है, सूतक काल को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं. आज सुबह 6:23 बजे से सूतक काल शुरू हो चुका है. हालांकि, कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर सूतक काल होता क्या है, यह कितने समय का होता है और इसे क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं इन सभी सवालों का जवाब-

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सूतक काल क्या होता है? 

हिंदू धर्म में सूतक उस अवधि को कहा जाता है जो ग्रहण शुरू होने से कुछ घंटे पहले लगती है और ग्रहण समाप्त होने तक रहती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह समय सामान्य दिनों की तुलना में संवेदनशील माना जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है.

कैसे होती है सूतक काल की गणना?

सूतक की गणना ग्रहण के प्रकार पर निर्भर करती है. यदि चंद्र ग्रहण है, तो सूतक ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है. वहीं, सूर्य ग्रहण के मामले में यह अवधि 12 घंटे पहले से मानी जाती है. यानी अगर चंद्र ग्रहण शाम 6 बजे शुरू हो रहा है, तो सूतक सुबह 9 बजे से प्रभावी माना जाएगा. जैसे ही ग्रहण समाप्त होता है, सूतक भी स्वतः खत्म हो जाता है.

धार्मिक दृष्टि से सूतक काल को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है. सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. घरों में भी मूर्ति पूजा, नए कार्यों की शुरुआत और मांगलिक कार्यक्रमों से बचा जाता है. इस समय भोजन पकाने और खाने की भी मनाही मानी जाती है. हालांकि, छोटे बच्चों, बीमार व्यक्तियों और बुजुर्गों के लिए इन नियमों में छूट दी जाती है.

सूतक काल को ध्यान, जाप और आत्मचिंतन के लिए अच्छा समय माना गया है. यह अवधि व्यक्ति को संयम, शांति और आध्यात्मिक अभ्यास की ओर प्रेरित करती है.

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ज्योतिष शास्त्र में भी ग्रहण और सूतक को विशेष महत्व दिया गया है. मान्यता है कि इस समय ग्रहों की स्थिति में बदलाव का प्रभाव मन और वातावरण पर पड़ सकता है. इसलिए सावधानी और सतर्कता बरतना उचित माना गया है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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