होली पर लगने वाले चंद्र ग्रहण को क्यों कहा जा रहा है 'ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण'? ज्योतिषाचार्य से जानें इसका मतलब

Chandra Grahan 2026: 3 मार्च 2026 को होली के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. इस ग्रहण को 'ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण' कहा जा रहा है. आइए ज्योतिषाचार्य से जानते हैं इसका मतलब-

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चंद्र ग्रहण को क्यों कहा जा रहा है 'ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण'?

Chandra Grahan 2026: 3 मार्च 2026 को होली के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और भारत में भी दिखाई देगा. इस ग्रहण को 'ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण' कहा जा रहा है. ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण होता क्या है या इसका मतलब क्या है? आइए ज्योतिषाचार्य से जानते हैं इस बारे में-

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चंद्र ग्रहण को क्यों कहा जा रहा है 'ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण'? 

इसे लेकर NDTV संग हुई खास बातचीत के दौरान ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित ने बताया, चंद्र ग्रहण को 'ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण' इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसका उदय जब होगा, उस समय भारत में चंद्रमा दिखाई नहीं देगा. यानी जब चंद्र ग्रहण शुरू होता है लेकिन उस समय भारत में चंद्रमा दिखाई नहीं देता और चंद्रमा उदय होने के बाद ग्रहण का आखिरी हिस्सा दिखता है, तो उसे 'ग्रस्तोदित' कहा जाता है.

इस बार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा, लेकिन उस समय भारत में चांद आसमान में नहीं होगा. भारत में चंद्रमा शाम करीब 6:26 से 6:32 बजे के बीच उदय होगा. उस समय ग्रहण का अंतिम चरण चल रहा होगा. ग्रहण लगभग 6:46 से 6:47 बजे के बीच समाप्त हो जाएगा. यानी भारत में यह ग्रहण सिर्फ 15-20 मिनट के लिए ही दिखाई देगा.

सूतक काल कब से लगेगा?

चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखेगा, इसलिए सूतक काल मान्य रहेगा. सूतक काल 3 मार्च की सुबह 6:23 बजे से शुरू हो जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूतक के दौरान पूजा-पाठ, मंदिर प्रवेश और शुभ कार्यों से बचना चाहिए.

ग्रहण के समय क्या करें?

धार्मिक दृष्टि से ग्रहण के दौरान भगवान का नाम लेना बहुत शुभ माना जाता है. आप 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप कर सकते हैं. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी लाभकारी माना गया है. इस समय गीता, रामायण या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अच्छा माना जाता है. माना जाता है कि ग्रहण के समय किया गया जप-तप कई गुना फल देता है.

ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?

ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करना चाहिए. घर में गंगाजल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है. भगवान की मूर्तियों को स्नान कराकर दोबारा पूजा करें. इसके बाद दान-पुण्य करना बहुत फलदायी माना गया है. जरूरतमंद लोगों को अन्न, कपड़े या धन का दान करना शुभ रहता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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