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Chaitra Navratri 2026 Day 3 LIVE: आज नवरात्रि का तीसरा दिन है. तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की सच्ची निष्ठा से पूजा-अर्चना करने से जीवन में शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन आता है. ऐसे में आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र, मां का भोग, शुभ रंग और कथा और आरती.

Maa Chandraghanta Mantra | मां चंद्रघंटा का मंत्र  

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्.
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्.
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्.
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्.
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

Mar 21, 2026 07:51 (IST)

मां चंद्रघंटा पूजा अनुष्ठान

भक्त सुबह-सुबह स्नान करते हैं.

वे साफ-सुथरे कपड़े पहनते हैं.

देवी दुर्गा को फूल या माला अर्पित करें और देसी घी से दीया जलाएं.

फल, श्रृंगार उत्पाद और सिंदूर या कुमकुम अर्पित करें.

दुर्गा चालीसा और सप्तशती पाठ का पाठ करें.

शाम को भोग प्रसाद चढ़ाने के बाद मां दुर्गा की आरती का पाठ करें.

लोग देवी को भोग प्रसाद अर्पित करने के बाद सात्विक भोजन से अपना व्रत तोड़ सकते हैं.

प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों से परहेज करें.

Mar 21, 2026 07:48 (IST)

मां चंद्रघंटा की आरती | Maa Chandraghanta Aarti Lyrics in Hindi

जय जयति जय चंद्रघंटा मां जय जयति जय चंद्रघंटा

तुम्हरे नाम का बजता, तुम्हरे नाम का बजता सृष्टि में डंका 

मां जयति जय चंद्रघंटा 

दशभुजा मात के सोहे खड्ग खपार धारी, मां खड्ग खपार धारी 

घंटा माथ विराजे, घंटा माथ विराजे, घंटा माथ विराजे, अर्ध चन्द्रकारी 

मां जयति जय चंद्रघंटा 

सिंह वाहिनी देवी दानव संघारे, मां दानव संघारे 

छवि अनुपम है मैया, छवि अनुपम है मैया, शक्ति अवकारी 

मां चंद्रघंटा की पूरी आरती पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Mar 21, 2026 07:24 (IST)

मां चंद्रघंटा दिन 3 महत्व

सूर्य ग्रह पर चंद्रघंटा देवी का शासन है. देवी पार्वती का चंद्रघंटा रूप शांत है और जो लोग सद्भाव से उनकी पूजा करते हैं, उन्हें देवी सुख, धन और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि उनके माथे पर चंद्रमा की ध्वनि से उनकी आभा शुद्ध होती है और नकारात्मकता दूर होती है, क्योंकि वे मणिपुर चक्र की देवी हैं, जो नाभि पर स्थित है, इसलिए नवरात्रि के दिन योग और आध्यात्मिकता का अभ्यास करने वालों के लिए ध्यान शुरू करने का आदर्श समय है.

Mar 21, 2026 07:22 (IST)

मां चंद्रघंटा 2026 कहानी

नवरात्रि का तीसरा दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा को समर्पित है. ऐसा माना जाता है कि इस ब्रह्मांड में न्याय और व्यवस्था की स्थापना देवी चंद्रघंटा ने ही की थी. देवी पार्वती का विवाहित रूप चंद्रघंटा है. भगवान शिव से विवाह के बाद, देवी ने अपने माथे पर अर्धचंद्र धारण करना शुरू कर दिया था. अर्धचंद्र के कारण देवी पार्वती को मां चंद्रघंटा कहा जाता है. वह सिंह पर सवार है, जो धर्म का प्रतीक है.

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