Surya Tilak: रामनवमी के मौके पर हुआ रामलला का सूर्य तिलक, जानिए क्या होता है सूर्य तिलक, कैसे सूरज की किरणें करती हैं प्रभु राम का अभिषेक

Surya Tilak on Ram Navami: रामनवमी के सबसे खास अवसर पर दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. यह दिव्य दृश्य करीब 4 मिनट तक रहा, जिसे देखकर सभी भक्त मंत्र मुग्ध हो गए.

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कैसे होता है सूर्य तिलक?
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What is Surya Tilak: आज रामनवमी के पावन अवसर पर देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है. इस खास दिन पर अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में अभूतपूर्व उत्सव देखने को मिला. मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया, वहीं सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रामलला के दर्शन के लिए उमड़ पड़ी. वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना के बीच रामनवमी का पर्व पूरी आस्था और भव्यता के साथ मनाया गया. रामनवमी के सबसे खास अवसर पर दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. यह दिव्य दृश्य करीब 4 मिनट तक रहा, जिसे देखकर सभी भक्त मंत्र मुग्ध हो गए. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, कि सूर्य तिलक क्या होता है और राम मंदिर में सूरज की किरण कैसे राम लला का अभिषेक करती हैं...

कैसे होता है सूर्य तिलक?

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क्या होता है सूर्य तिलक?

रामनवमी के पावन दिन पर ठीक दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणों से रामलला के मस्तक पर तिलक किया गया. इस अनोखे और दिव्य आयोजन के लिए भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा मिरर और लेंसों की एक खास सिस्टम बनाया गया है. इसी तकनीक की मदद से सूर्य की किरणें सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती हैं और रामलला के माथे पर चमकता हुआ तिलक बनाता है. सूर्य तिलक का चमत्कारी दृश्य कुछ ही मिनटों तक दिखाई देता है, लेकिन यह क्षण श्रद्धालुओं को मंत्र मुग्ध कर देता है. इसके अलावा जो भक्त मंदिर परिसर में मौजूद नहीं हो पाते, उनके लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से सूर्य तिलक का सीधा प्रसारण अयोध्या में लगे बड़ी स्क्रीन पर किया जाता है. साथ ही देश‑दुनिया के लोग इस दिव्य पल को न्यूज चैनलों के जरिए भी देख सकते हैं.

सूरज की किरणों से कैसे होता है राम लला का अभिषेक?

राम मंदिर में रामलला के माथे पर सूरज की किरणें पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों ने 3 दर्पणों का इस्‍तेमाल किया है. इसमें पहला दर्पण टॉप फ्लोर (तीसरे तल) पर लगाया गया है. ऐसे में जब दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें इस दर्पण पर पड़ती हैं, उन्‍हें 90 डिग्री में रिफ्लेक्‍ट कर एक पाइप के जरिए दूसरे मिरर तक पहुंचाया जाता है. फिर वहां से सूर्य की किरणें रिफ्लेक्‍ट होकर तीसरे मिरर तक पहुंचती हैं. इसके बाद तीसरे मिरर से रिफ्लेक्ट होते हुए सूरज की किरणें स्पीड के साथ रामलला के माथे पर पड़ती हैं.

अयोध्या में रामनवमी पर भक्तों की भारी भीड़

रामनवमी के लिए अयोध्या में पिछले कई दिनों से भक्तों की भारी भीड़ जुट रही है. चैत्र राम नवमी मेला चल रहा है. जिसके लिए लगातार श्रद्धालु राम नगरी पहुंच रहे हैं. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने बताया, 'हर दिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं.' 

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