Vaishakh Masik Shivratri Kab Hai: हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती हैं और जीवन में सफलताएं मिलती हैं. मासिक शिवरात्रि के अवसर पर भक्त जलाभिषेक करते हैं और व्रत रखते हैं. वैशाख महीने की मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है. इसी कड़ी में आज हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि इस साल वैशाख महीने की मासिक शिवरात्रि का व्रत कब रखा जाएगा. आइए जानते हैं सही तारीख और शुभ मुहूर्त...
कब रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल 2026 को रात में 10 बजकर 31 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन अगले दिन 16 अप्रैल को शाम 8 बजकर 11 मिनट पर होगा. ऐसे में निशिता काल को देखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा.
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क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?
मासिक शिवरात्रि की पूजा निशिता मुहूर्त में करना बेहद फलदायी माना जाता है. पंचांग के अनुसार 15 अप्रैल को शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 15 मिनट से देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा. आप इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं.
मासिक शिवरात्रि पर करें इस मंत्र का जाप
- ॐ नमः शिवाय
- नमो नीलकण्ठाय
- ॐ पार्वतीपतये नमः
मासिक शिवरात्र पर करें भगवान शिव की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.














