Akshaya Tritiya 2026 Snan-Daan ka Punyafal: हिंदू धर्म में वैशाख मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को धन की देवी की पूजा के लिए अत्यंत ही शुभ एवं फलदायी माना गया है. अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला यह पावन पर्व उदया तिथि के आधार पर आज मनाया जा रहा है. काशी विद्वत परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. राम नारायण द्विवेद्वी के अनुसार अक्षय तृतीया का पर्व 20 अप्रैल 2026 को मनाया जाना उचित है. उनके अनुसार इस पावन तिथि को शास्त्रों में जया तिथि अर्थात् जीत दिलाने वाली दिव्य तिथि माना गया है. यही कारण है कि इस पावन तिथि पर किए जाने वाले कार्य का अक्षय फल प्राप्त होता है. आइए अक्षय तृतीया पर किए जाने वाले स्नान-दान का धार्मिक महत्व और महाउपाय जानते हैं.
अक्षय तृतीया की पूजा और दान आज क्यों?
जाने माने ज्योतिषविद् एवं संत स्वामी इंदुभवानंद तीर्थ जी महाराज के अनुसार अक्षय तृतीया हमेशा परवृद्धा अर्थात् चतर्थुी से युक्त ही गणना करना चाहिए. उनके अनुसार निर्णय सिंधु में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर अक्षय तृतीया दो दिन व्याप्तहो तो दूसरे दिन वाली ही तिथि को मानना चाहिए. ऐसे में आज उदया तिथि को आधार मानते हुए 20 अप्रैल 2026, सोमवार के दिन ही अक्षय तृतीया का पर्व मनाना चाहिए क्योंकि इसी दिन ही स्नान और दान का अक्षय पुण्यफल प्राप्त होगा. स्वामी इंदुभावनानंद के अनुसार अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग हो जाने से इसका धार्मिक महत्व बढ़ गया है.
अक्षय पुण्य पाने के लिए जलतीर्थ पर करें स्नान
हिंदू मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर गंगा, यमुना, गोदावरी या फिर किसी अन्य जलतीर्थ पर स्नान और श्री हरि का ध्यान करने पर साधक को पुण्यफल की प्राप्ति होती है. यदि आप किसी जल तीर्थ पर न जा पाएं तो नहाने वाले जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. यदि गंगा जल भी न हो तो पवित्र नदियों का ध्यान करते हुए स्नान करें.
आज अक्षय तृतीया पर किन चीजों का करें दान?
हिंदू मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर स्नान के साथ दान का भी बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति या फिर मंदिर के पुजारी को शीतल जल से भरा घड़ा, हाथ वाला पंखा, चप्पल-जूते, छाता, खरबूजा, सत्तू, आदि का दान कर सकते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया के पर्व पर गर्मी से राहत देने वाले इन सभी चीजों का दान करने पर व्यक्ति को अक्षय पुण्यफल की प्राप्ति होती है.
अक्षय तृतीया का महाउपाय
इन तमाम चीजों के साथ अक्षय तृतीया पर नमक के दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि धन की देवी मां लक्ष्मी का प्राकट्य समुद्र से हुआ था और नमक भी समुद्र से उत्पन्न होता है. ऐसे में इसे माता लक्ष्मी के भाई के रूप में माना जाता है. मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर घर में सेंधा नमक खरीद कर लाने और इसका दान करने पर माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
अक्षय तृतीया सिर्फ धन की देवी की साधना से ही नहीं जुड़ी हुई है, बल्कि इसके अन्य धार्मिक महत्व भी हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम, भगवान हयग्रीव और नर-नारायण का प्राकट्य हुआ था. यही कारण है कि इस पावन तिथि पर सिर्फ माता लक्ष्मी की ही नहीं बल्कि भगवान विष्णु समेत उनके इन अवतारों की पूजा का भी बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. इसी पावन तिथि पर जहां बद्रीनाथ धाम के पट खुलते हैं तो वहीं वृंदावन में बांके बिहारी के भक्तों को उनके चरण दर्शन का पुण्यफल प्राप्त होता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














