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मुन्नाभाई एमबीबीएस वाला ‘डमी कैंडिडेट गेम’ आखिर असल में कैसे होता है?

Dummy Candidates : डमी कैंडिडेट ऐसे लोग होते हैं, जो किसी दूसरे कैंडिडेट्स की जगह परीक्षा देने पहुंचते हैं. ज्यादातर मामलों में ये लोग पढ़ाई में तेज होते हैं और पैसे लेकर परीक्षा देने का काम करते हैं.

मुन्नाभाई एमबीबीएस वाला ‘डमी कैंडिडेट गेम’ आखिर असल में कैसे होता है?
सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर कोई दूसरा व्यक्ति एग्जाम सेंटर तक पहुंच कैसे जाता है.

Dummy Candidates : फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस' का वो सीन शायद आपको याद होगा, जिसमें मुन्ना की जगह एक डॉ रुस्तम मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम देने पहुंच जाता है. फिल्म में इसे मजाकिया अंदाज में दिखाया गया था और दर्शकों ने इसे मनोरंजन की तरह देखा भी. लेकिन असल जिंदगी में भी कई कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं, जहां असली छात्र या कैंडिडेट्स की जगह कोई दूसरा व्यक्ति परीक्षा देता पकड़ा गया. मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET हो, इंजीनियरिंग के लिए JEE, लॉ एंट्रेंस CLAT या फिर सरकारी भर्ती परीक्षाएं... अलग-अलग राज्यों में “डमी कैंडिडेट” या “इम्पर्सनेशन” के मामले जांच एजेंसियों और पुलिस के सामने आ चुके हैं. ऐसे मामलों ने परीक्षा सुरक्षा और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं.

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डमी कैंडिडेट क्या होते हैं?

डमी कैंडिडेट ऐसे लोग होते हैं, जो किसी दूसरे कैंडिडेट्स की जगह परीक्षा देने पहुंचते हैं. यानी असली उम्मीदवार की जगह कोई और एग्जाम हॉल में बैठकर पेपर देता है. ज्यादातर मामलों में ये लोग पढ़ाई में तेज होते हैं और पैसे लेकर परीक्षा देने का काम करते हैं. कई बार इसके पीछे पूरा नेटवर्क काम करता है, जो फर्जी आईडी, एडमिट कार्ड, फोटो मैचिंग और पहचान छिपाने जैसी चीजें मैनेज करता है. कई मामलों में असली उम्मीदवार और डमी कैंडिडेट की शक्ल मिलती-जुलती होने की भी कोशिश की जाती है.

कैसे होती है इनकी एंट्री?

सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर कोई दूसरा व्यक्ति एग्जाम सेंटर तक पहुंच कैसे जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह कमजोर वेरिफिकेशन या पहचान जांच में लापरवाही होती है. कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड, एडिटेड एडमिट कार्ड या फोटो बदलकर एंट्री लेने की कोशिश की जाती है. कुछ मामलों में बायोमेट्रिक सिस्टम को चकमा देने या अंदरूनी मिलीभगत के आरोप भी सामने आए हैं. यही वजह है कि अब कई बड़ी परीक्षा एजेंसियां फेस रिकग्निशन, लाइव फोटो मैचिंग, फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं.

किन परीक्षाओं में सामने आए ऐसे मामले?

देश में पिछले कुछ सालों के दौरान NEET समेत कई भर्ती और एंट्रेंस परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट पकड़े जाने के मामले सामने आए हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में पुलिस ने कई बार ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जो किसी दूसरे की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे. कुछ मामलों में हैंडराइटिंग, फोटो और बायोमेट्रिक जांच के जरिए गड़बड़ी पकड़ी गई, जबकि कुछ जगहों पर एग्जाम सेंटर पर ही शक होने के बाद आरोपी पकड़े गए.

काबिल स्टूडेंट्स के भविष्य पर असर

डमी कैंडिडेट का सीधा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ता है, जो ईमानदारी से मेहनत करके परीक्षा देते हैं. अगर कोई व्यक्ति पैसे या जुगाड़ के दम पर किसी और से एग्जाम दिलवाकर सीट हासिल कर लेता है, तो उसका नुकसान योग्य उम्मीदवारों को उठाना पड़ता है. यही वजह है कि अब परीक्षा एजेंसियां सुरक्षा व्यवस्था और पहचान जांच को लगातार सख्त कर रही हैं.

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