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फर्जी अटेंडेंस के लिए 'रबर के अंगूठे' का खेल! राजस्थान स्कॉलरशिप घोटाले में 300 संस्थान फंसेंगे

राज्य की मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के बाद, सरकार ने 300 से अधिक शिक्षण संस्थानों का संयुक्त विशेष ऑडिट (Special Audit) कराने का आदेश दिया है.

फर्जी अटेंडेंस के लिए 'रबर के अंगूठे' का खेल! राजस्थान स्कॉलरशिप घोटाले में 300 संस्थान फंसेंगे
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए 'रबर के अंगूठे' का इस्तेमाल कर बायोमेट्रिक अटेंडेंस ली जाती थी, जिससे फर्जी अटेंडेंस बनाई जाती रही.

Rajasthan Scholarship Scam: राजस्थान में स्कॉलरशिप के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसके बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. फर्जी अटेंडेंस के लिए 'रबर के अंगूठे' का इस्तेमाल और दस्तावेजों में हेरफेर कर स्कॉलरशिप डकारने वाले 300 से अधिक शिक्षण संस्थान अब सरकार के रडार पर हैं. भजनलाल सरकार ने इन सभी संस्थानों के विशेष ऑडिट के आदेश दे दिए हैं.

2 से 3 सालों के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे

जांच में पिछले 2 से 3 सालों के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे. इसके दायरे में करीब 5 लाख स्टूडेंट्स के दस्तावेज भी शामिल होंगे.

DOIT और ऑडिट डिपार्टमेंट साथ में करेंगे जांच

ऑडिट डीओआईटी (DOIT) और ऑडिट डिपार्टमेंट संयुक्त रूप से करेंगे. डीओआईटी तकनीकी पहलुओं की जांच करेगा, जबकि ऑडिट डिपार्टमेंट छात्रवृत्ति राशि के भुगतान और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल करेगा.

30 संस्थानों को किया गया ब्लैकलिस्ट

एनडीटीवी से विशेष बातचीत में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि सरकार ने हाल ही में 30 शिक्षण संस्थानों को ब्लैकलिस्ट किया है. जिन संस्थानों में गड़बड़ी मिली है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों की जांच कराई जा रही है ताकि कहीं और भी अनियमितता हुई हो तो उसे सामने लाया जा सके.

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कुछ ई-मित्र संचालकों ने छात्रों के दस्तावेज एकत्र कर आधार और जन-आधार से जुड़े मोबाइल नंबर बदल दिए. इसके बाद ओटीपी उनके पास पहुंचने लगे और छात्रवृत्ति से जुड़ी आईडी का दुरुपयोग किया गया.

'रबर के अंगूठे' से फर्जी अटेंडेंस

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए 'रबर के अंगूठे' का इस्तेमाल कर बायोमेट्रिक अटेंडेंस ली जाती थी, जिससे फर्जी अटेंडेंस बनाई जाती रही. सरकार तकनीकी व्यवस्था को भी मजबूत करने पर काम कर रही है. माना जा रहा है कि यदि छात्रवृत्ति प्रक्रिया का पूरा नियंत्रण डीओआईटी के एकीकृत सॉफ्टवेयर के जरिए किया जाए तो भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.

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