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IIT से भी ज्यादा पेटेंट फाइल कर रहीं प्राइवेट यूनिवर्सिटीज, जानें क्या है इसका पूरा प्रोसेस

Patent Filing Process: इंडियन पेटेंट ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक पेटेंट फाइल करने के मामले में भले ही प्राइवेट यूनिवर्सिटीज आगे हों, लेकिन उनका सक्सेस रेट काफी कम है. वहीं इस मामले में आईआईटी और एनआईटी का सक्सेस रेट काफी बेहतर है.

IIT से भी ज्यादा पेटेंट फाइल कर रहीं प्राइवेट यूनिवर्सिटीज, जानें क्या है इसका पूरा प्रोसेस
पेटेंट फाइल में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज का कम सक्सेस रेट

Patent Filing Process: भारत में हजारों यूनिवर्सिटीज हैं, जहां एडमिशन के लिए लाखों बच्चे हर साल आवेदन करते हैं. आमतौर पर जब भी पेरेंट्स अपने बच्चे के लिए कॉलेज चुनते हैं तो वो इसकी रैंकिंग या फिर रिसर्च में उसकी अचीवमेंट को देखते हैं. हालांकि कई कॉलेज और यूनिवर्सिटीज इसके लिए एक दूसरा रास्ता अपना रही हैं. पिछले कुछ सालों में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की तरफ से भारी संख्या में पेटेंट फाइल किए गए हैं, जिससे संस्थान की एक्टिविटी इंप्रूव होती है और इसी को सामने रखकर वो एडमिशन लेते हैं. हालांकि मंजूरी मिलने के मामले में ऐसी यूनिवर्सिटीज काफी पीछे हैं. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि पेटेंट कैसे फाइल होता है और यूनिवर्सिटी को इससे क्या फायदा मिलता है. 

IIT से ज्यादा पेटेंट फाइलिंग

इंडियन पेटेंट ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक पेटेंट फाइलिंग के मामले में IIT, NITs और IISc का शानदार प्रदर्शन रहा है. वहीं कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ऐसी हैं, जिन्होंने इन बड़े संस्थानों से भी ज्यादा पेटेंट फाइल तो किए, लेकिन इसका सक्सेस रेट काफी नीचे है. इसके पीछे एक सोची समझी रणनीति को वजह माना जा रहा है, जिसमें पेटेंट फाइलिंग की संख्या को दिखाकर सिर्फ अपनी रैंकिंग सुधारने की कोशिश की जा रही है. 

क्या कहते हैं आंकड़े

पेटेंट ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) ने 2020-2025 के बीच कुल 6,558 पेटेंट फाइल किए, जिनमें से 2,806 को मंजूरी मिली. यानी पिछले पांच साल में 43% का सक्सेस रेट रहा, वहीं 2020 से लेकर 2023 तक ये 64% था. ठीक इसी तरह भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने 2020-23 में कुल 379 पेटेंट फाइल किए, जिनमें से 257 को मंजूरी मिली. यानी 68% का सक्सेक रेट रहा. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NITs) ने भी इसमें अच्छा प्रदर्शन किया और 67.1% सक्सेस रेट के साथ पेटेंट हासिल किए. 

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज का बुरा हाल

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) से लेकर हाल ही में विवादों में रही गलगोटिया यूनिवर्सिटी के आंकड़े काफी निराशाजनक रहे हैं. इन संस्थानों ने भारी संख्या में पेटेंट फाइल किए, लेकिन इनमें से कुछ को ही मंजूरी मिल पाई. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने पिछले पांच सालों में 7,096 पेटेंट फाइल किए, जिनमें से सिर्फ 164 को मंजूरी मिली. वहीं गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने पांच सालों में 2,233 पेटेंट फाइल किए, इनमें  महज 2 को मंजूरी मिली.

कैसे फाइल होता है पेटेंट?

पेटेंट अमेंडमेंट रूल्स 2024 के तहत पेटेंट फाइल किए जाते हैं. खास बात ये है कि ये प्रोसेस काफी सस्ता और आसान है, यही वजह है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी लगातार सैकड़ों पेटेंट फाइल कर रहे हैं. अगर आप कोई इनवेंटर हैं और आपने किसी खास चीज की खोज कर ली है तो आपको इसका पेटेंट लेना होता है. आमतौर पर किसी बड़ी इनोवेशन या फिर टेक्नोलॉजी के पेटेंट लिए जाते हैं. स्टार्टअप्स, एजुकेशन इंस्टीट्यूशन और बाकी संस्थान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. 

  • पेटेंट के लिए सबसे पहले अपने इनवेंशन को कागज पर उतारना होता है. इसमें हर चीज की जानकारी देनी होती है कि ये कैसे काम करता है और इसका क्या इस्तेमाल है. 
  • पेटेंट के लिए एक एग्रीमेंट भी साइन करवा सकते हैं, जिससे आपका आइडिया चोरी न हो. इसके बाद ये चेक करें कि पहले से किसी ने दुनिया में इस तरह की चीज पर काम तो नहीं किया है. 
  • पेटेंट का ड्राफ्ट तैयार कर इसे भारतीय पेटेंट ऑफिस में जमा कराना होता है. ऐसा करने के बाद आपको एक नंबर मिलेगा और जब तक मंजूरी नहीं मिलती, तब तक प्रोडक्ट पर Patent Pending लिखना होगा. 
  • पेटेंट फाइल करने के बाद अपने आइडिया या इनोवेशन को जर्नल में पब्लिश करवाना होता है, जिससे आप लोगों को ये बता दें कि इस पर आपका ही अधिकार है. ये प्रोसेस आमतौर पर 18 महीने बाद होता है. 
  • अगले प्रोसेस में सरकारी अधिकारियों की तरफ से आपके पेटेंट की जांच होती है और अगर कोई सवाल होते हैं तो वो पूछे जाते हैं. इसमें ये साबित करना होता है कि आपका आइडिया सबसे अलग है और ये लोगों के काम आ सकता है. 
  • सभी चीजों से संतुष्ट होने और जवाब मिलने के बाद पेटेंट सर्टिफिकेट दिया जाता है. जिसके बाद 20 साल तक उस प्रोडक्ट या फिर आइडिया पर आपका अधिकार हो जाता है. 

कितनी लगती है फीस?

पेटेंट फाइलिंग फीस व्यक्तिगत, स्टार्टअप, छोटे संस्थान या शैक्षणिक संस्थानों के लिए ₹1,600 है. वहीं अन्य बड़ी कंपनियों के लिए ये ₹8,000 रखी गई है. इसके अलावा पेटेंट ड्राफ्टिंग और वकील की फीस पर भी कुछ पैसा लगता है. 

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