- केंद्र सरकार ने एयरक्राफ्ट मेंटिनेंस इंजीनियरिंग में बीएससी डिग्री कोर्स शुरू करने जा रही है.
- गति शक्ति विश्वविद्यालय और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के बीच एमओयू के तहत यह कोर्स शुरू होगा.
- ग्लोबल कमीशन, एयरबस और सफरान समेत कई प्रमुख संस्थानों की पाठ्यक्रम तैयार करने में अहम भूमिका होगी.
केंद्र सरकार ने एयरक्राफ्ट मेंटिनेस इंजीनियरिंग (AME) शिक्षा को नया रूप देने का फैसला किया है. इसके तहत सरकार अब एयरक्राफ्ट मेंटिनेस इंजीनियरिंग में बीएससी (B.Sc) डिग्री कोर्स शुरू करने जा रही है. इस तीन वर्षीय कोर्स की शुरुआत शैक्षणिक सत्र 2026–27 से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जाएगी, जिसे लेकर सोमवार को गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV ) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA ) के बीच समझौता ज्ञापन (MOU) होगा. नई योजना के तहत एएमई को अब अधिक मानकीकृत, आधुनिक और इंडस्ट्री-उन्मुख बनाया जाएगा ताकि छात्रों को सीधे रोजगार के अवसर मिल सके. पहले चरण में यह कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जीएमआर स्कूल ऑफ एविएशन (GMR School of Aviation) और एयर इंडिया एएमई अकादमी (Air India AME Academy) में शुरू किया जाएगा. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है.
रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नए पाठ्यक्रम को तैयार करने में ग्लोबल कमीशन, एयरबस, सफरान और जीएमआर स्कूल ऑफ एविएशन की अहम भूमिका है. ईएनएसी फ्रांस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी जल्द ही इसमें शामिल होने वाले हैं.
भारत को वैश्विक एमआरओ हब बनाना लक्ष्य
नागरिक विमानन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पहल का मकसद देश में कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करना और भारत को वैश्विक एमआरओ (MRO - Maintenance, Repair, and Overhaul) हब बनाना है. यही वजह है कि युवाओं के लिए आकर्षक करियर विकल्प बनाने के लिए डिग्री कोर्स शुरू किया जा रहा है.
DGCA अधिकारियों की होगी विशेष ट्रेनिंग
योजना के तहत अब गति शक्ति विश्वविद्यालय डीजीसीए के साथ मिलकर सतत विमानन ईंधन (SAF) जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध करेगा. इसके अलावा, डीजीसीए के अधिकारियों को नई तकनीकों और नियमों की बेहतर समझ देने के लिए क्षमता-विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे.
शिक्षा, उद्योग और नियामक व्यवस्था के बीच बनेगा पुल
जीएसवी की नोडल भूमिका विनियमन, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण करेगी. जबकि डीजीसीए सिविल एविशन रेगुलेशन (CAR) -66 और सीएआर-147 ढांचों के तहत लाइसेंसिंग मानकों को निर्धारित करना जारी रखेगा. वहीं, जीएसवी नया पाठ्यक्रम विकसित करने के साथ प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाएगा, शोध को बढ़ावा देगा और इंडस्ट्री-लिंक्ड अप्रेंटिसशिप मॉडल तैयार कर एक राष्ट्रीय शैक्षणिक केंद्र के रूप में काम करेगा.
विमान मेंटिनेस की क्षमता होगी मजबूत
डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही हैंड्स-ऑन एमआरओ ट्रेनिंग के साथ सिमुलेशन लैब का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा. इसके अलावा, मूल उपकरण निर्माता (OEM) कंपनियों के साथ भी एक्सपोजर मिलेगा, जिससे देश में विमान मेंटेनेंस की घरेलू क्षमता और मजबूत होगी.
एमआरओ क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा भारत
एविएशन क्षेत्र के एक्सपर्ट्स का कहना है कि गीएसवी और डीजीसीए की यह पहल भारत को एमआरओ सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाएंगी. साथ ही देश को वैश्विक विमान मेंटेनेंस केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगी.
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