असम के कछार जिले में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT) सिलचर, कैंपस विवादों से घिर गया है. दरअसल NIT सिलचर ने खुले और साझा स्थानों पर सभी तरह की धार्मिक गतिविधियों पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है. इस फैसले के कारण ही ये विवाद का केंद्र बन गया है. यह फैसला एक वायरल वीडियो के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के चलते लिया गया है. जिसमें कथित तौर पर छात्रों का एक समूह हॉस्टल के अंदर नमाज़ पढ़ते हुए दिखाई दे रहा था. इस फैसले ने छात्रों के बीच और बाहर भी एक बहस छेड़ दी है. खासकर तब जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों ने इसमें दखल देते हुए, कैंपस के माहौल पर सवाल उठाए हैं.
कॉलेज प्रशासन ने जारी किया सख्त निर्देश
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के स्थानीय संगठन ने जिला प्रशासन को एक औपचारिक शिकायत भी सौंपी है. इस शिकायत में उन्होंने कुछ फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों पर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. इसे पक्षपातपूर्ण और हिंदू-विरोधी करार दिया है. साथ ही छात्रों के कट्टरपंथी बनने के भी दावे किए हैं. बढ़ते दबाव के बीच, संस्थान ने कार्रवाई की. Students' Welfare के डीन की अध्यक्षता में एक बैठक की गई. जिसमें एक सख़्त निर्देश जारी किया गया. इस आदेश में कहा गया, किसी भी छात्र, स्टाफ सदस्य या हॉस्टल में रहने वाले व्यक्ति को कैंपस के साझा या खुले इलाकों में प्रार्थना या धार्मिक सभाओं में शामिल होने की अनुमति नहीं है. इस आदेश का उल्लंघन होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
प्रशासन ने साफ किया है कि इस कदम का मकसद अशांति को रोकना है. लेकिन कई छात्र इसका विरोध कर रहे हैं. कई छात्रों का कहना है कि लगाए गए बैन से समस्याओं को सुलझाने के बजाय उनके और गहराने का खतरा है. सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर इस पर ज़बरदस्त प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिली हैं.
पुलिस ने शुरू की जांच
इस बीच, स्थानीय पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है और संस्थान के अधिकारियों के संपर्क में है. प्रशासन ने संकेत दिया है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की समीक्षा की जाएगी.
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