NEET Paper Leak 2026: पटना के राजेंद्रनगर की तंग गलियों में एक कमरा है, जहां किताबों का ढेर और दीवार पर चिपके फॉर्मूले राहुल की तीन साल की तपस्या के गवाह हैं. लेकिन आज उन किताबों पर धूल नहीं, राहुल के आंसू गिरे हैं. नीट (NEET) की परीक्षा रद्द होने की खबर ने राहुल को तोड़कर रख दिया है. यह सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, बल्कि एक मध्यमवर्गीय परिवार के उन हजारों सपनों का कत्ल है, जो पिछले कई सालों से एक-एक पैसा जोड़कर देखे गए थे.
NEET परीक्षा रद्द होने से 22 लाख से ज्यादा छात्रों को झटका लगा है, उन्हीं में से एक हैं, राहुल. बिहार की राजधानी पटना के रहनेवाले राहुल ने NDTV से अपना दर्द बयां किया है. ये केवल उनका नहीं, बल्कि उनके जैसे हजारों छात्रों का दुख है, उनकी तकलीफें हैं.
जानिए राहुल की कहानी, उन्हीं की जुबानी.
'मां को घर पर छोड़ा, पापा मेरे साथ कोट चल दिए'
मेरा नाम राहुल है, मैं राजेंद्रनगर, पटना के एक मिडिल क्लास फैमिली का लड़का हूं. मेरे पिता अजय प्रसाद राय का अपना छोटा सा कारोबार था. जब मैंने डॉक्टर बनने का सपना देखा, तो उन्होंने एक पल नहीं सोचा.
मां को घर पर अकेला छोड़कर, अपना काम-काज बंद कर वे मुझे लेकर राजस्थान के कोटा चले गए. दो साल तक हम वहां एक छोटे से कमरे में रहे. पापा ने सिर्फ घर नहीं छोड़ा, अपनी सुख-सुविधाएं भी छोड़ दीं.
'पापा ने मेरे साथ रतजगे किए, अपना वजूद दांव पर लगा दिया'
जब मैं रात भर जागकर पढ़ता था, तो पापा भी मेरे साथ रतजगा करते थे. कभी मेरे लिए कॉफी बना देते, तो कभी सिर्फ इसलिए जागते रहते कि मुझे अकेलापन महसूस न हो. उन्होंने मेरे लिए अपना वजूद दांव पर लगा दिया था.
कोटा की उन तपती गलियों में जब मैं थक जाता था, तो पापा का चेहरा देखकर फिर से हिम्मत जुटानी पड़ती थी. हम इसी उम्मीद में जिए कि एक दिन मैं 'डॉक्टर साहब' बनकर उनके इन बलिदानों का कर्ज उतारूंगा.

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'तीन साल में दूसरी बार झेला मैंने ये दर्द'
मैं पिछले तीन साल से इस परीक्षा के लिए खुद को झोंक रहा हूं. यह मेरे साथ दूसरी बार हुआ है जब परीक्षा या उसकी प्रक्रिया इस तरह विवादों में फंसी है. इस बार पेपर बहुत अच्छा गया था, मुझे एक अच्छे कॉलेज की पूरी उम्मीद थी, लेकिन किस्मत और सिस्टम ने एक बार फिर मुझे एक साल का लंबा इंतजार थमा दिया. परीक्षा के 10 दिन बाद जब पता चला कि पेपर मास लेवल पर लीक हो गया है, तो लगा जैसे किसी ने मेरा कलेजा निकाल लिया हो.
'हमारे पास बस अपनी मेहनत, बाकी तो...'
नीट की तैयारी में हम जैसे मिडिल क्लास बच्चों पर मानसिक दबाव बहुत ज्यादा होता है. हमारे पास वे एसेट्स या बैंक बैलेंस नहीं है कि अगर 10-15 नंबर कम रह जाएं तो करोड़ों रुपये देकर किसी प्राइवेट इंस्टीट्यूशन में दाखिला ले लें. हमारे पास सिर्फ हमारी मेहनत और पापा की जमा-पूंजी होती है. बार-बार महंगी कोचिंग अफोर्ड करना हमारे बस की बात नहीं है. जब ऐसी खबरें आती हैं, तो मन निराशा से भर जाता है और ऐसा लगता है कि कहीं हम 'बर्न आउट' न हो जाएं.

'आंखों में चमक होनी थी, अब माथे पर चिंता की लकीरें'
कोटा से लौटने के बाद मैं घर पर ही ऑनलाइन क्लास के जरिए तैयारी कर रहा था. मां घर पर अकेली हमारे सफल होने की राह देख रही थीं. पापा की आंखों में जो चमक पेपर देने के बाद आई थी, वो अब फिर से चिंता की लकीरों में बदल गई है. सरकार ने सख्ती की, जीपीएस लगवाया, सब ठीक है, लेकिन फिर भी पेपर लीक हो जाना, बेहद निराशाजनक है.
हार नहीं सकता, किताबें खुल गई हैं, बस अगली बार ऐसा न हो!
दुख बहुत है, गुस्सा भी है, लेकिन मेरे पास हार मानने का रास्ता नहीं है. अगर मैं टूट गया तो पापा की वो रातें और उनका छोड़ा हुआ कारोबार सब बेकार चला जाएगा. इसलिए, परीक्षा कैंसिल होने की खबर के तुरंत बाद मैंने अपने आंसू पोंछे और फिर से तैयारी में लग गया हूं. किताबें फिर से खुल गई हैं, लेकिन दिल में बस एक ही डर है- क्या अगली बार ईमानदारी से मेरा भविष्य तय होगा?
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