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JEE Main Result 2026: ऐसे तैयार की जाती है आपकी Percentile, NTA ने बताया कैलकुलेट करने का तरीका

JEE Main 2026 Percentile: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने जेईई मेन 2026 सेशन 2 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं. इस बार एग्जाम में कुल 10,34,330 छात्रों ने हिस्सा लिया था.

JEE Main Result 2026: ऐसे तैयार की जाती है आपकी Percentile, NTA ने बताया कैलकुलेट करने का तरीका

JEE Main 2026 Percentile: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने जेईई मेन 2026 सेशन 2 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं. इस बार एग्जाम में कुल 10,34,330 छात्रों ने हिस्सा लिया था. इनमें 26 कैंडिडेट्स ऐसे हैं, जिन्‍होंंने परफेक्ट पर्सेंटाइल के साथ टॉप किया है. लेकिन इस एग्‍जाम में बैठे कई छात्र यह नहीं समझ पा रहे कि पर्सेंटाइल कैसे कैलकुलेट की गई. इन्‍हीं छात्रों व अभिभावकों की सहूलियत के लिए NTA ने एक्‍स पर इस बारे में विस्‍तार से जानकारी दी है. 

क्‍या होती है पर्सेंटाइल  

अगर आपने भी पहली बार इंजीनियरिंग परीक्षा दी है, और नहीं जानते हैं कि पर्सेंटाइल क्या है और कैसे कैलकुलेट किया गया, तो सबसे पहले ये जान लीजिए कि जेईई मेन, नीट जैसी परीक्षाओं में पर्सेंटाइल के आधार पर मेरिट लिस्‍ट तैयार की जाती है. पर्सेंटाइल और पर्सेंटेज में फर्क होता है. पर्सेंटाइल का साधारण शब्‍दों में अर्थ ये होता है कि आपको कितने स्टूडेंट से अधिक नंबर मिले हैं. जैसे अगर आपका पर्सेंटाइल 70 प्रतिशत आता है, तो इसका मतलब होता है कि आपने 70 प्रतिशत छात्रों से अधिक अंक हासिल किए हैं. 

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NTA ने शेयर किया पोस्‍ट 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्‍ट किया है और इस बारे में विस्‍तार से बताया है- 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इस पोस्‍ट के माध्‍यम से साफ किया है कि चाहे पेपर-सेटिंग करने वाली कमेटियां कितनी भी सावधानी और कठोरता से काम करें,  फिर भी दो अलग-अलग प्रश्नपत्रों की कठिनाई बिल्कुल समान नहीं हो सकती है. दुनिया का कोई भी परीक्षा संगठन, जो मल्टी-शिफ्ट परीक्षा आयोजित करता है, इसी चुनौती का सामना करता है. इसी कारण NTA पर्सेंटाइल प्रणाली का उपयोग करता है. 

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अगर किसी छात्र का पर्सेंटाइल 99.5 है, तो इसका मतलब है कि उसने अपनी शिफ्ट के 99.5 प्रतिशत अभ्यर्थियों से बेहतर प्रदर्शन किया है. चाहे पेपर कठिन रहा हो या आसान रहा हो. चाहे टॉपर ने 285 अंक प्राप्त किए हों या 300 अंक. क्‍योंकि हर शिफ्ट अपने आप में एक समान स्तर बन जाती है. उस शिफ्ट के भीतर रैंकिंग पूरी तरह अंकों पर आधारित होती है, क्योंकि परीक्षा के दौरान सभी उम्मीदवारों ने समान परिस्थितियों का सामना किया होता है. 

इसीलिए NTA सामान्यीकरण यानी normalization प्रक्रिया का उपयोग करता है. प्रत्येक शिफ्ट के भीतर परर्सेंटइाल स्कोर किया जाता है, और फिर इन परर्सेंटइाल को मिलाकर अंतिम रैंकिंग यानी मेरिट लिस्‍ट तैयार कर दी जाती है. 

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