जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने शनिवार को निजी विश्वविद्यालय विधेयक पारित कर दिया. इस विधेयक में केंद्र शासित प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, उनके कामकाज, प्रबंधन और शैक्षणिक मानकों को विनियमित करने के प्रावधान किए गए हैं. शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने बिल पेश करते हुए कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है. विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए “मील का पत्थर” बताया.
सीएम बोले- बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्र जम्मू-कश्मीर से बाहर जाते थे, लेकिन अब इस विधेयक से प्रदेश में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध होंगे. उन्होंने विधेयक को केंद्र शासित प्रदेश के शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और सीखने-अनुसंधान के लिए जीवंत वातावरण बनाने की दिशा में नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की प्रतिबद्धता बताया.
उच्च शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने सदन में कहा कि सरकार ने विधेयक तैयार करने से पहले उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी सभी चिंताओं और मुद्दों को ध्यान में रखा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह विधेयक निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देगा.
विधायकों ने वापस लिए संशोधन
विधेयक पर चर्चा के दौरान कुछ विधायकों मीर सैफुल्ला, निजामुद्दीन भट, पीरजादा फारूक अहमद शाह, तनवीर सादिक और बलवंत सिंह मनकोटिया ने संशोधन पेश किए. सरकार से आश्वासन मिलने के बाद अधिकांश विधायकों ने अपने संशोधन वापस ले लिए. जबकि विधायक मनकोटिया का संशोधन ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया. इसी दौरान विधानसभा ने जम्मू-कश्मीर जन विश्वास द्वितीय (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक भी पारित किया, जिसे कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने सदन में पेश किया.
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