Study in India : दुनिया भर के छात्र हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को तवज्जो देते आए हैं. लेकिन अब यह ट्रेंड धीरे-धीरे बदल रहा है. हाल के सालों में विदेशी छात्रों ने बड़ी संख्या में भारत का रुख किया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में स्टूडेंट वीजा पर आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. साल 2022 में 39,202, 2023 में 49,437 और 2024 में 56,538 विदेशी छात्र भारत आए, जो दो साल में लगभग 44 फीसदी की बढ़ोतरी है. इससे साफ है कि भारत अब दुनियाभर में एक उभरता हुआ एजुकेशनल हब बन रहा है.
सस्ती और क्वालिटी एजुकेशन ने बदला खेल
भारत की सबसे बड़ी ताकत कम लागत में क्वालिटी एजुकेशन है. एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कई देशों के छात्र ऐसे देश की तलाश में रहते हैं, जहां पढ़ाई का स्तर अच्छा हो और खर्च भी ज्यादा न हो. भारत इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, हेल्थ साइंसेज, डिजाइन, मीडिया और न्यू टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में पढ़ाई के अच्छे अवसर देता है. इसके साथ ही कई यूनिवर्सिटीज ऐसी भी हैं, जो पढ़ाई के साथ-साथ एंटरप्रेन्योरशिप, इनोवेशन और इंडस्ट्रीज से जुड़ाव पर भी जोर देते हैं. इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस भी मिलता है. इसके साथ ही यहां इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई होने से विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई करना आसान हो जाता है. इसके अलावा भारत में रहने और पढ़ाई का कुल खर्च अमेरिका या यूरोप के कई देशों की तुलना में काफी कम है.
सरकारी पॉलिसीज से बढ़ा भरोसा
विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या के पीछे सरकार की नई पॉलिसीज भी एक बड़ा कारण हैं. यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC) ने कॉलेजों और यूनिवर्सिटी को विदेशी छात्रों के लिए 25 फीसदी एक्स्ट्रा सीटें रखने की अनुमति दी है. इसके अलावा टेक्निकल एजुकेशन से जुड़े संस्थानों के लिए AICTE ने भी विदेशी छात्रों के एडमिशन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए हैं. इससे संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने में मदद मिल रही है.
बेहतर सुविधाओं से आसान हो रही पढ़ाई
कई भारतीय यूनिवर्सिटीज ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अलग इंटरनेशनल ऑफिस, हॉस्टल, भाषा सहायता और काउंसलिंग सर्विसेज शुरू की हैं. इससे एप्लीकेशन से लेकर वीजा, अराइवल और कैंपस ऑन-बोर्डिंग तक का पूरा प्रोसेस आसान हो गया है. कई प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में तो आज 1000 से 3000 तक विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जो दिखाता है कि भारत में अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय तेजी से बढ़ रहा है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत अब केवल एक ऑप्शन नहीं बल्कि हायर एजुकेशन का एक मजबूत ग्लोबल हब बनता जा रहा है. अगर आने वाले समय में छात्र अनुभव, सुविधाओं और रोजगार के अवसरों को और बेहतर बनाया जाता है, तो भारत दुनिया के प्रमुख एजुकेशनल हब्स में शामिल हो सकता है.
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