CBSE Three-Language Policy Row: CBSE से जुड़े विवाद खत्म होने के नाम नहीं ले रहे हैं. ऑन स्क्रीन मार्किंग के बाद अब CBSE थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सवालों के घेरे में है. इस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से विवाद जारी है और अब सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर हो चुकी है. कुछ छात्रों और पेरेंट्स की तरफ से ये याचिका दायर की गई है. अचानक 9वीं क्लास में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी गई है. खास बात ये है कि इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार भी हो गया है.
थ्री लैंग्वेज पॉलिसी क्या है?
सीबीएसई ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत थ्री लैंग्वेज सिस्टम को स्कूलों में लागू करने की बात कही थी. इसके तहत स्कूलों में दो भारतीय भाषाओं में पढ़ाई जरूरी है, इसके अलावा एक भाषा कोई भी हो सकती है, जो आमतौर पर अंग्रेजी होती है. यानी हिंदी और अंग्रेजी के अलावा एक और भारतीय भाषा में पढ़ाई को जरूरी किया जा रहा है.
क्या है विवाद?
पहले कहा गया था कि तीन भाषाओं वाली ये पॉलिसी कक्षा 6 से शुरू होगी और फिर आगे बढ़ती जाएगी, लेकिन अब इसे 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए भी लागू कर दिया गया है. ऐसे में पेरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चों ने छठी कक्षा से किसी और भाषा की पढ़ाई की थी और अचानक उन्हें भारतीय भाषा को पढ़ना होगा. छात्रों ने कहा है कि ये उनके लिए एक बोझ की तरह है, उन्हें किसी ऐसी भाषा को चुनने का विकल्प मिलना चाहिए, जो आगे चलकर उनके काम आए. कुछ छात्र अंग्रेजी और एक भारतीय भाषा के बाद तीसरी भाषा के तौर पर चाइनीज, जर्मन या फिर फ्रेंच सीखना चाहते हैं.
अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई होनी है. छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिलेगी. फिलहाल सीबीएसई की तरफ से इस मामले को लेकर कुछ भी नहीं कहा जा रहा है.
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