पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी में साफ पानी अब लोगों के लिए सपना बन गया है. घरों के नलों से मटमैला, बदबूदार पानी आ रहा है, जिससे रहने वालों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. हालात इतने खराब हैं कि लोग न तो यह पानी पी सकते हैं, न खाना बना सकते हैं और न ही पौधों तक को दे पा रहे हैं.
86 वर्षीय विमला अरोड़ा बताती हैं कि पिछले 6-7 महीनों से उनके घर में सीवर जैसे बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है. ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित विमला भारी पानी की बोतल भी नहीं उठा सकतीं, इसलिए छोटी बोतलों के सहारे काम चला रही हैं. उनका दर्द छलक पड़ता है जब वे कहती हैं, 'बेटे की शादी हो चुकी है, लेकिन इस हालात में उन्हें घर खाने पर बुलाने की भी हिम्मत नहीं.'
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'बदबू से बचने के लिए चलाते हैं पंखे'
एक मंजिल नीचे, 85 वर्षीय केपी महाजन की कहानी भी कुछ अलग नहीं है. बीते 50 सालों से इसी घर में रह रहे महाजन कहते हैं कि इतने खराब हालात उन्होंने कभी नहीं देखे. बदबू से बचने के लिए घर में पंखे चलाने पड़ते हैं. उनका साफ कहना है कि अगर समस्या नहीं सुधरी तो प्रशासन उन्हें कहीं और शिफ्ट करे.
खराब पानी से बीमार हो रहे लोग
यह समस्या अब सिर्फ असुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेहत पर भी असर डाल रही है. 61 वर्षीय जगमीत सिंह बताते हैं कि सितंबर 2025 में उन्हें टाइफाइड हुआ और ठीक होने में दो महीने लग गए. उनकी बेटी को पीलिया हो चुका है. अब उनका परिवार पूरी तरह बोतलबंद पानी पर निर्भर है. उनका कहना है कि साफ पानी नागरिकों का अधिकार है और प्रशासन को अब जागना होगा.
नाराज स्थानीय लोग बताते हैं कि वे पिछले एक साल में 12 से ज्यादा शिकायतें दर्ज करा चुके हैं. इंजीनियरों से लेकर उच्च अधिकारियों, यहां तक कि मंत्री और मुख्यमंत्री तक जवाब जरूर मिले, लेकिन जमीन पर हालात वही हैं. अधिकारियों का दावा है कि पानी की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन जनकपुरी के लोग कहते हैं कि हकीकत अब भी नलों में बहते गंदे पानी की तरह बदहाल है.














