दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की इंजीनियर रशीद की याचिका, टेरर फंडिंग से जुड़ा है मामला

आतंक के वित्तपोषण मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद रशीद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं.

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इंजीनियर रशीद की याचिका खारिज
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  • दिल्ली HC ने आतंक के वित्तपोषण मामले में इंजीनियर रशीद की याचिका को खारिज कर दिया है
  • इंजीनियर रशीद 2019 से तिहाड़ जेल में हैं और एनआईए के अधीन गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम के तहत गिरफ्तार हैं
  • एनआईए ने रशीद पर आईपीसी की आपराधिक साजिश, सरकार के खिलाफ युद्ध और राजद्रोह की धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं
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नई दिल्ली:

दिल्ली हाई कोर्ट ने जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के बारामूला से लोकसभा सदस्य शेख अब्दुल रशीद उर्फ ​​इंजीनियर रशीद की उस याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने टेरर फंडिंग मामले में उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती दी थी.जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बंच ने कहा कि अधीनस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ रशीद की अपील सुनवाई योग्य नहीं है. उन्होंने अपील को सुनवाई योग्य नहीं पाए जाने पर इसे खारिज कर दिया.  

2024 के लोकसभा चुनावों में उमर अब्दुल्ला को हराया

बता दें कि  टेरर फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद रशीद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं. बारामूला के सांसद रशीद ने 2024 के लोकसभा चुनावों में उमर अब्दुल्ला को हराया था. वह जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी समूहों को वित्तीय सहायता देने के आरोपों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं.

एनआईए की FIR के अनुसार, व्यवसायी और सह-आरोपी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान रशीद का नाम सामने आया. अक्टूबर 2019 में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद, मार्च 2022 में एक विशेष एनआईए अदालत ने रशीद और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), धारा 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और धारा 124ए (राजद्रोह) के और यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्यों और आतंक के वित्तपोषण से संबंधित अपराधों के लिए आरोप तय किए.

2019 में हुई थी इंजीनियर रशीद की गिरफ्तारी

इंजीनियर रशीद को साल 2017 के टेरर फंडिंग मामले में  2019 में गिरफ्तार किया गया था. NIA की गिरफ्तारी के बाद से वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. दो बार के विधायक ने जेल से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उत्तरी कश्मीर की बारामूला सीट से जीत हासिल की.

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इनपुट- भाषा के साथ

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