दिल्ली के पहले राजघाट पॉवर प्लांट में शाम होगी गुलज़ार, चिमनी का भी होगा मेकओवर

दिल्ली के बीच और यमुना किनारे होने के चलते राजघाट पावर प्लांट की खाली पड़ी 45 एकड़ में से 35 एकड़ जमीन का इस्तेमाल बड़े-बड़े आयोजनों के लिए किया जा सकेगा. सरकार की कोशिश रहेगी कि यहां ऐसा कुछ तैयार करवाया जाए, जिससे किसी तरह का प्रदूषण न होने पाए, यही वजह है कि रिक्रिएशनल थीम पर पार्क बनाया जाएगा.

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  • दिल्ली सरकार राजघाट पावर प्लांट की खाली जमीन को नाइटलाइफ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विकसित कर रही है.
  • राजघाट पावर प्लांट की 45 एकड़ जमीन में से 35 एकड़ बड़े आयोजनों और रिक्रिएशनल पार्क के लिए उपयोग होगी.
  • पावर प्लांट की चिमनी को तिरंगा आकार दिया जाएगा ताकि यह एक पहचान बन सके और गिराने का खर्च बचाया जा सके.
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दिल्ली के पहले थर्मल पावर प्लांट को अब सूफी कन्सर्ट और नाइट लाइफ को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. यमुना किनारे बंद पड़े राजघाट पावर प्लांट की खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल न सिर्फ नाइट लाइफ बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. दिल्ली सरकार एक DPR तैयार करवा रही है कि कैसे दिल्ली के पर्यटन को बढ़ावा देने और राजस्व बढ़ाने में बंद पड़े राजघाट पावर प्लांट का इस्तेमाल हो सकता है. दिल्ली के बीच और यमुना किनारे होने के चलते राजघाट पावर प्लांट की खाली पड़ी 45 एकड़ में से 35 एकड़ जमीन का इस्तेमाल बड़े-बड़े आयोजनों के लिए किया जा सकेगा. सरकार की कोशिश रहेगी कि यहां ऐसा कुछ तैयार करवाया जाए, जिससे किसी तरह का प्रदूषण न होने पाए, यही वजह है कि रिक्रिएशनल थीम पर पार्क बनाया जाएगा.

पहले बनना था 500 MW सोलर पार्क 

राजघाट पावर प्लांट की जमीन पर पहले भी सरकारों ने कई योजनाएं बनाई थीं. पहले एनर्जी म्यूजियम बनाने की योजना थी, फिर 5000 MW सोलर पार्क बनाने की योजना बनी, फिर दिल्ली सचिवालय बनाने पर भी विचार किया गया. अब इसका इस्तेमाल पर्यटन के लिए करने की योजना बनाई जा रही है.

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राजघाट पावर प्लांट की चिमनी का क्या होगा?

राजघाट पावर प्लांट की चिमनी को गिराने में बहुत ज्यादा खर्चा आने की संभावना है. लिहाजा सूत्रों के मुताबिक इसे तिरंगा का आकार दिया जाएगा, ताकि ये एक तरह की पहचान बने. इसी तरह पावर प्लांट के स्क्रैप से कई तरह के थीम पार्क भी तैयार करने की योजना बनाई जा रही है.

दिल्ली का पहला पावर प्लांट राजघाट प्लांट था 

दिल्ली का ये ऐतिहासिक पावर प्लांट है. सबसे पहले दिल्ली में 1905 में 2 MW डीजल से चलने वाला प्लांट लाहौर गेट के पास लगा. आजादी के बाद 1951 में राजघाट पावर प्लांट की शुरुआत 5मेगा वाट बिजली बनाने से शुरु हुई थी. ताकि ये दिल्ली की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर सके.

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कई विदेशी मॉडल का भी हो रहा अध्ययन 

सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के लिए बिजली विभाग ने देश और विदेश में सफल रहे रिडेवलपमेंट मॉडल्स का अध्ययन किया है. इसमें न्यूयॉर्क का हाई लाइन पार्क, लंदन का बैटरसी पावर स्टेशन, जर्मनी का जोलवेराइन कोल माइन और कनाडा का टोरंटो डिस्टिलरी डिस्ट्रिक्ट शामिल हैं. प्रस्ताव के तहत राजघाट पावर प्लांट परिसर को कैफे, लाइव कॉन्सर्ट, सूफी नाइट्स, ओपन-एयर परफॉर्मेंस स्पेस और मनोरंजन जोन के रूप में विकसित किया जाएगा. इसका उद्देश्य दिल्ली में नाइटलाइफ को बढ़ावा देना, पर्यटन को प्रोत्साहित करना और सरकार के लिए राजस्व के नए स्रोत तैयार करना है.

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