- दिल्ली के द्वारका सेक्टर-24 में गोल्फ कोर्स के कृत्रिम तालाब में तीन बच्चों की डूबने से मौत हुई
- पांच फुट ऊंची बाउंड्री वॉल और गार्ड रूम के बावजूद बच्चे अंदर कैसे पहुंचे
- पुलिस और दमकल विभाग ने बच्चों के शव निकाले, लेकिन अभी तक उनकी पहचान और परिवार का पता नहीं चल पाया है
देश की राजधानी के द्वारका इलाके से एक ऐसी खबर आई है जिसने सुरक्षा इंतजामों और प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है. सेक्टर-24 स्थित गोल्फ कोर्स के कृत्रिम तालाब में डूबने से तीन मासूमों की मौत ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि 5 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल और हर वक्त तैनात रहने वाले सुरक्षा गार्डों के बावजूद ये बच्चे अंदर कैसे पहुंचे और तालाब तक जा पहुंचे?
पुलिस और दमकल विभाग ने शवों को बाहर तो निकाल लिया है, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी बच्चों की शिनाख्त नहीं हो पाई है और न ही किसी परिवार ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है. डीडीए ने जांच कमेटी बना दी है, पर सवाल वही बरकरार है इन मौतों का जिम्मेदार कौन?"
इस मामले में अब डीडीए (DDA) ने बयान जारी किया है. अथॉरिटी ने कहा, "द्वारका गोल्फ कोर्स में हुई यह घटना, जिसमें तीन बच्चों की दुखद मृत्यु हो गई, अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है. इस कठिन समय में हम शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं." अपने बयान में आगे कहा गया कि इस घटना की जांच के लिए निदेशक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया है और उसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
सुरक्षा में चूक या बड़ी लापरवाही?
द्वारका में बने इस गोल्फ कोर्स के चारों तरफ बाउंड्री वॉल है, जिसकी ऊंचाई करीब 5 फीट है. इसके पास ही एक गार्ड रूम भी बना है, जहां सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहती है. सवाल यह है कि इतनी सुबह बच्चे तालाब में नहाने के लिए इतनी ऊंची दीवार को पार कर अंदर कैसे पहुंचे? अगर वे वहां गए थे, तो उस समय तैनात गार्ड कहां मौजूद थे?
पुलिस की तफ्तीश और शिनाख्त की कोशिश
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, बच्चों के कपड़े तालाब के बाहर मिले हैं, जिससे अंदेशा है कि वे नहाने के लिए उतरे थे. पुलिस और दमकल विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद तीनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला, जिनकी उम्र 8 से 10 साल के बीच है. हालांकि, अभी तक इन बच्चों की पहचान नहीं हो सकी है. पुलिस अब आसपास के गांवों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये बच्चे कहां से आए थे.
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