- दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 40 टन जैव-चिकित्सा अपशिष्ट उत्पन्न होता है.
- वर्तमान में केवल 2 उपचार संयंत्र पूरे शहर के जैव-चिकित्सा कचरे का प्रबंधन करते हैं.
- सरकार ने प्रतिदिन छियालीस टन क्षमता वाले तीन नए संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है.
दिल्ली में बढ़ते स्वास्थ्य ढांचे और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (Bio-medical Waste) का प्रबंधन एक गंभीर विषय बन गया है. राजधानी में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 40 टन चिकित्सा कचरा उत्पन्न हो रहा है, जिसमें अस्पतालों से निकलने वाली प्रयुक्त सिरिंज, शल्य चिकित्सा अपशिष्ट, प्रयोगशाला सामग्री और पीपीई किट जैसे सुरक्षात्मक उपकरण शामिल हैं. इस बढ़ते भार के प्रबंधन के लिए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की.
मौजूदा चुनौतियां और भविष्य का लक्ष्य
वर्तमान में दिल्ली के सभी जिलों से निकलने वाले इस विशाल अपशिष्ट का प्रबंधन केवल दो उपचार संयंत्रों के भरोसे है. स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विस्तार और 2031 तक जनसंख्या वृद्धि के अनुमानों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि मौजूदा बुनियादी ढांचा भविष्य में अपर्याप्त साबित होगा. इसी 'क्षमता अंतराल' को भरने के लिए दिल्ली सरकार ने शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का निर्णय लिया है.
नई योजना: अत्याधुनिक उपचार संयंत्र
सरकार की योजना 46 टन प्रतिदिन की कुल क्षमता वाली नई साझा जैव-चिकित्सा अपशिष्ट उपचार सुविधाएं (CBWTF) स्थापित करने की है. यह नई प्रणाली लगभग 2,300 किलोग्राम प्रति घंटा की दर से कचरे का निपटान करने में सक्षम होगी और ये संयंत्र प्रतिदिन 20 घंटे तक संचालित किए जाएंगे. प्रत्येक नए संयंत्र के लिए कम से कम 0.5 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी.
समान वितरण और आधुनिक तकनीक
इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य कचरे के भार को शहर के विभिन्न हिस्सों में समान रूप से वितरित करना है. प्रस्तावित मॉडल के अनुसार, प्रत्येक नई सुविधा तीन जिलों के कचरे का प्रबंधन करेगी, जिससे मौजूदा दो संयंत्रों पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव कम होगा. इन संयंत्रों में कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए ऑटोक्लेविंग (कीटाणुशोधन), श्रेडिंग (कतरन) और सुरक्षित लैंडफिलिंग जैसी अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाएगा.
मंत्री सिरसा ने जोर देकर कहा कि दिल्ली के नागरिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए इन संयंत्रों का सुचारू संचालन अनिवार्य है, क्योंकि अनियंत्रित मेडिकल कचरा गंभीर संक्रमण और बीमारियों का कारण बन सकता है. भविष्य में इन संयंत्रों के दैनिक संचालन पर नजर रखने के लिए एक डिजिटल निगरानी डैशबोर्ड भी तैयार किया जाएगा. इसके लिए जल्द ही वैश्विक निविदाएं (Tenders) जारी की जाएंगी ताकि अत्याधुनिक तकनीक वाले साझीदारों को इस परियोजना से जोड़ा जा सके.
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