रंगली वैसाखी 3.0: पीतमपुरा में सजा 'मिनी पंजाब', युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की अनूठी पहल

दिल्ली के पीतमपुरा स्थित गुरु गोविंद सिंह कॉलेज में 'रोज़ा हर्बल केयर' द्वारा 'रंगली वैसाखी 3.0' का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को पंजाबी संस्कृति और विरासत से जोड़ना था, जिसमें भांगड़ा और गिद्दा प्रतियोगिताओं के साथ-साथ पारंपरिक पंजाबी मेले का भी आनंद लिया गया.

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नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के पीतमपुरा स्थित गुरु गोविंद सिंह कॉलेज में 'रोज़ा हर्बल केयर' द्वारा वार्षिक 'रंगली वैसाखी 3.0' का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया. इस कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए रोज़ा हर्बल केयर के सीईओ राव चरण सिंह नारंग ने बताया कि यह आयोजन पिछले तीन वर्षों से लगातार किया जा रहा है, ताकि सोशल मीडिया के दौर में आज की युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पंजाबी विरासत से जुड़ सके. (अनिल कुमार अत्री की र‍िपोर्ट)

भांगड़ा किंग और गिद्दा क्वीन के बीच कड़ा मुकाबला

कार्यक्रम में 'भांगड़ा किंग' और 'गिद्दा क्वीन' टाइटल के लिए सोलो कॉम्पिटिशन आयोजित किया गया, जिसमें करीब 100 प्रविष्टियों में से चुने गए टॉप 13 प्रतिभागियों ने कड़ा मुकाबला किया. संस्थान के डायरेक्टर हरकिरण सिंह ने इसे दिल्ली-एनसीआर का अपनी तरह का पहला अनूठा प्रयास बताया, जहाँ ऑनलाइन नॉमिनेशन के जरिए बच्चों को एक मंच प्रदान किया गया. कॉलेज परिसर में 'मिनी पंजाब' की झलक दिखाने के लिए एक विशेष मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें फुलकारी, पंजाबी जुत्ती, पारंपरिक भोजन, चूड़ियों और मेहंदी के स्टॉल्स के माध्यम से पंजाबी कल्‍चर और विरसे (विरासत) को बखूबी प्रमोट किया गया. 

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Photo Credit: अनिल कुमार अत्री

राव चरण सिंह नारंग, CEO, रोज़ा हर्बल केयर 

राव चरण सिंह नारंग ने बताया कि, "आज हम यहाँ 'रंगली वैसाखी' मना रहे हैं. वैसाखी सिखों का एक बहुत बड़ा त्यौहार है, जिसे सब रल-मिलकर मनाते हैं. यहाँ बच्चों के लिए परफॉरमेंस कॉम्पिटिशन आयोजित किया गया है, जिसमें विजेताओं को 'भांगड़ा किंग' और 'भांगड़ा क्वीन' के टाइटल दिए जाएँगे. टॉप 3 विनर्स चुने जाएँगे. साथ ही हमने यहाँ पंजाब का मेला लगाया है, जिसका उद्देश्य फुलकारी, जुत्ती और पंजाबी कल्चर को प्रमोट करना है. हमने बच्चों के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है, जहाँ वे अपना टैलेंट शोकेस कर सकें. आज की नई यूथ को यह पता लगना चाहिए कि पंजाबी कल्चर में क्या-क्या विशेषताएँ हैं."

उन्होंने आगे जानकारी दी कि, "प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागी दिल्ली-एनसीआर के हैं. कॉलेज के इन बच्चों ने इंडिविजुअल ऑडिशन देकर यहाँ तक का सफर तय किया है. हमारे पास करीब 100 एंट्रीज आई थीं, जिनमें से टॉप 13 प्रतिभागियों को आज के फाइनल मुकाबले के लिए चुना गया है. मेले में पंजाबी फूड, हैंडक्राफ्टेड फुलकारी और पारंपरिक चूड़ियों व मेहंदी के स्टॉल्स लगाए गए हैं. यह परिवार के साथ मिलकर मनाने वाला त्यौहार है."

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सीईओ नारंग ने अंत में कहा कि, "यह 'रोज़ा हर्बल केयर' का एक वार्षिक इवेंट है, जिसे हम पिछले तीन साल से करा रहे हैं और भविष्य में इसे और बड़े स्तर पर ले जाएँगे. चूँकि आजकल की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी जड़ों से बिछड़ती जा रही है, इसलिए हम उन्हें अपने कल्चर और रूट्स के साथ जोड़ना चाहते हैं." 

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Photo Credit: अनिल कुमार अत्री

हरकिरण सिंह, डायरेक्टर, रोज़ा हर्बल केयर

संस्थान के डायरेक्टर हरकिरण सिंह ने बताया, "आज हम यहाँ 'रंगली वैसाखी 3.0' के लिए इकट्ठा हुए हैं. यह हमारा तीसरा सीजन है. इसमें बच्चों का सोलो भांगड़ा और गिद्दा कॉम्पिटिशन हो रहा है, जो दिल्ली-एनसीआर में अपनी तरह का पहला प्रयास है. हम पिछले तीन साल से यह इनिशिएटिव लेकर चल रहे हैं. ऑनलाइन नॉमिनेशन्स के ज़रिए बच्चे इस प्रतियोगिता का हिस्सा बने हैं और आज शाम को 'भांगड़ा किंग' व 'गिद्दा क्वीन' के विजेताओं की घोषणा की जाएगी. हमने इस कार्यक्रम की थीम पूरी तरह से सांस्कृतिक रखी है ताकि इसे 'मिनी पंजाब' के रूप में देखा जा सके. हमारा मकसद यही है कि नई जनरेशन अपने विरसे (विरासत) के करीब आए और उसे बेहतर तरीके से समझे. यहां पंजाबी फूड आपको मिलेगा, पंजाबी जुत्तियाँ मिलेंगी और फुलकारी जो हैंडक्राफ्टेड होती है फुलकारी पंजाब की बहुत एक फेमस चीज़ है वो उसके स्टॉल्स मिलेंगे आपको साथ ही साथ और बथेरे सारे बैंगल्स हैं, मेहंदी का है, मतलब पूरा एक फैमिली के साथ मनाने वाला त्यौहार है जिसको रल-मिल के सब मना रहे हैं यहाँ पर." 

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