Delhi LPG Cylinder Scam: हाल ही में अपनी गैस बुकिंग हिस्ट्री चेक की है? अगर नहीं, तो यह खबर आपके होश उड़ा देगी. राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां उपभोक्ताओं के हक के सिलेंडर उनकी जानकारी के बिना ही गायब किए जा रहे हैं. साल के 12 सिलेंडर का कोटा बुक दिखा रहा है, लेकिन उपभोक्ता के घर पहुंच रहे हैं सिर्फ आधे. आखिर कौन है इस गैस सिंडिकेट के पीछे?
बुक किया एक सिलेंडर, रिकॉर्ड में दो
दिल्ली के पहाड़गंज इलाके के रहने वाले रंजीत डोगरा के होश तब उड़ गए जब उन्होंने इंडियन ऑयल का मोबाइल ऐप इंस्टॉल किया. रंजीत का छोटा सा परिवार है पत्नी पत्नी और दो छोटे बच्चे. साल भर में सिर्फ 6 सिलेंडरों की खपत होती है, लेकिन जब उन्होंने अचानक ऐप इंस्टाल करके ऐप पर अपनी 'बुकिंग हिस्ट्री' देखी, तो कहानी कुछ और ही बयां कर रही थी उनकी पहली बुकिंग 17 अक्टूबर उपभोक्ता द्वारा की गई और फर्जी बुकिंग 24 अक्टूबर (बिना जानकारी के की गई इसी तरह अगली बुकिंग 11 नवंबर उनके द्वारा कि गई फिर फर्जी बुकिंग 24 नवंबर को बिना जानकारी के की गई.
कहां गया दूसरा सिलेंडर
यानी महीने में सिलेंडर एक आया, लेकिन रिकॉर्ड में दो दर्ज हो गए. रंजीत डोगरा का आरोप है कि उनकी बिना अनुमति और बिना ओटीपी (OTP) के ये बुकिंग कैसे हुई ? और सबसे बड़ा सवाल वह दूसरा सिलेंडर गया कहां?
बुक किया 6 सिलेंडर, हिस्ट्री में 12 दिखा
पीड़ित रंजीत डोगरा, 'हमने जब ऐप पर चेक किया तो पता चला कि हमारा कोटा पूरा हो चुका है. हम तो साल में 6 ही सिलेंडर लेते हैं, लेकिन हिस्ट्री में 12 दिखा रहा है. अक्टूबर और नवंबर में तो हद ही हो गई, एक ही महीने में दो-दो बार बुकिंग दिखाई गई है, जबकि हमारे पास सिर्फ एक सिलेंडर आया. यह सीधा-सीधा फ्रॉड है.'
उपभोक्ता रंजीत डोगरा ने की शिकायत
यह कहानी सिर्फ रंजीत डोगरा की नहीं है. अब ऐसी शिकायतों आने लगी है. आशंका जताई जा रही है कि गैस एजेंसी के कर्मचारी या डिलीवरी बॉय मिलीभगत करके उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी बुकिंग करते हैं और उन सिलेंडरों को ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेच देते हैं. गैस कंपनियों का नियम कहता है कि साल में 12 सिलेंडर सब्सिडी पर मिलेंगे, लेकिन इस घोटाले के कारण ईमानदार उपभोक्ताओं का कोटा समय से पहले ही खत्म हो रहा है.
दिल्ली में सामने आया यह मामला एक बड़े गोरखधंधे की ओर इशारा कर रहा है. रंजीत डोगरा ने पहाड़गंज थाने में शिकायत दर्ज करा दी है और पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि बुकिंग के समय आने वाला ओटीपी और डिलीवरी का कन्फर्मेशन आखिर कैसे मैनेज किया गया? क्या इसमें गैस एजेंसी के रसूखदार लोग भी शामिल हैं?
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