3 लाख का लालच, Signal ऐप से चैट और 1600 नंबर...रोहित शेट्टी फायरिंग केस में हुए चौंकाने वाले खुलासे

रोहित शेट्टी के घर फायरिंग केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने 3 लाख के लालच, Signal चैट और 1600 मोबाइल नंबरों की जांच से पूरे नेटवर्क को ट्रेस किया है। मामले में आरजू बिश्नोई की भूमिका भी सामने आई है.

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  • रोहित शेट्टी के घर फायरिंग मामले में आरोपी शूटर दीपक को तीन लाख रुपये का लालच दिया गया था
  • दीपक और गोलू दोनों बाह गांव के निवासी हैं और पिछले तीन से चार साल से एक-दूसरे को जानते हैं
  • दोनों आरोपी ने Signal ऐप के जरिए संपर्क किया था जिससे पुलिस को उनकी बातचीत ट्रैक करने में काफी मशक्कत पड़ी
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बॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग की घटना को लेकर जैसे‑जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे‑वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला है कि इस वारदात के लिए आरोपी शूटर दीपक को करीब 3 लाख रुपये का लालच दिया गया था. यह रकम उसे उसके जानकार गोलू ने दी थी, जिसने उसे फायरिंग के लिए तैयार किया.

दीपक‑गोलू की पहचान और बैकग्राउंड

रोहित शेट्टी फायरिंग केस में क्राइम ब्रांच सूत्रों के मुताबिक, दीपक और गोलू दोनों एक ही इलाके बाह गांव के आसपास के रहने वाले हैं और पिछले 3-4 साल से एक‑दूसरे को जानते हैं. दोनों की कोई स्थायी नौकरी नहीं है. जहां दीपक का परिवार खेती और मजदूरी से जुड़ा हुआ है,वहीं गोलू पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है.

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Signal ऐप से होती थी बातचीत

जांच में यह भी सामने आया है कि दीपक और गोलू आपस में Signal ऐप के जरिए संपर्क में थे. इस वजह से पुलिस को उनकी बातचीत ट्रैक करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. एन्क्रिप्टेड ऐप के इस्तेमाल ने जांच को जटिल बना दिया, लेकिन तकनीकी विश्लेषण के जरिए पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे.

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पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और हथियार को लेकर विरोधाभास

सूत्रों के अनुसार, साल 2025 में राजस्थान में हुई एक फायरिंग की घटना में गोलू पहले भी काम कर चुका है. पुलिस अब उस मामले की भी जानकारी खंगाल रही है. वहीं इस केस में हथियार को लेकर दोनों आरोपियों के बयान एक‑दूसरे से टकरा रहे हैं. दीपक का कहना है कि गोलू ने उसे बंदूक दी थी, जबकि गोलू का दावा है कि दीपक खुद हथियार लेकर आया था. इस विरोधाभास को सुलझाने के लिए पुलिस फॉरेंसिक और तकनीकी सबूत जुटा रही है.

8 दिन ग्राउंड पर रही क्राइम ब्रांच की टीम

इस पूरे नेटवर्क को ट्रेस करने के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम करीब 8 दिन तक ग्राउंड पर डटी रही. इस दौरान करीब 1600 मोबाइल नंबरों का एनालिसिस किया गया, जिनमें कई नंबर हाल ही में एक्टिव हुए थे. मोबाइल टावर लोकेशन और नेटवर्क पैटर्न के आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले.

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मोबाइल टावर से लोकेशन क्लू, आगरा तक पहुंची जांच

जांच में मोबाइल टावर लोकेशन के जरिए आरोपियों के इलाके की पहचान की गई। इसी दौरान एक नया मोबाइल नंबर सामने आया, जिसने केस को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई. तकनीकी जांच के दौरान यह भी पता चला कि गोलू पंडित आगरा में मौजूद है. पुलिस अब उसके रोल और पूरे नेटवर्क में उसकी भूमिका की जांच कर रही है.

पुलिस पहुंची तो आरोपी ने किया सरेंडर

सूत्रों के मुताबिक, जब पुलिस टीम लोकेशन के आधार पर मौके पर पहुंची, तो आरोपी ने खुद ही सरेंडर कर दिया. इसी बीच क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार इस फायरिंग मामले में आरजू बिश्नोई का नाम भी सामने आया है. बताया गया है कि आरजू ने इस वारदात के लिए लॉजिस्टिक और अन्य जरूरी सपोर्ट मुहैया कराया था.

जांच जारी, और खुलासों की संभावना

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है. पैसों के लेन‑देन, हथियार की सप्लाई और डिजिटल कम्युनिकेशन जैसे सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है. पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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