आतंकी फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और सुप्रीम कोर्ट की धमकी... मुंबई में 85 साल के बुजुर्ग से 9 करोड़ की ठगी

22 दिसंबर 2025 को ठगों ने पीड़ित से एक और खाते में 3 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराने को कहा. जब पीड़ित बैंक ऑफ इंडिया की गिरगांव शाखा पहुंचे, तो बैंक कर्मचारियों ने ट्रांजैक्शन रोक दी और उनके रिश्तेदारों को बुलाने को कहा. तब जाकर परिवार को पूरे मामले की जानकारी मिली और ठगी का खुलासा हुआ.

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  • मुंबई के ठाकुरद्वार इलाके में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग से पुलिस अधिकारी बनकर करीब नौ करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई
  • ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग जैसे झूठे आरोप लगाकर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया
  • पीड़ित ने बैंक डिटेल्स, म्यूचुअल फंड और एफडी की जानकारी ठगों के साथ साझा कर विभिन्न खातों में रकम ट्रांसफर की
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मुंबई:

मुंबई के ठाकुरद्वार इलाके में रहने वाले 85 वर्षीय बुजुर्ग के साथ बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है. ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाया और मनी लॉन्ड्रिंग व आतंकी फंडिंग के झूठे आरोप लगाकर करीब 9 करोड़ रुपये की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली. पीड़ित बुजुर्ग ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वे अपने परिवार के साथ ठाकुरद्वार में रहते हैं. उनकी बड़ी बेटी उनके साथ रहती हैं, जबकि छोटी बेटी अमेरिका में रहती है.

ऐसे शुरू हुई ठगी

28 नवंबर 2025 को पीड़ित के मोबाइल पर एक कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को नासिक के पंचवटी पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्टर दीपक शर्मा बताया. उसने कहा कि पीड़ित के नाम और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है, जिससे बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. इतना ही नहीं, उसी खाते से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे प्रतिबंधित संगठन को पैसे भेजे जाने का झूठा दावा भी किया गया.

ठग ने यह भी कहा कि इस मामले की जांच CBI क्राइम ब्रांच और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कर रही है और जल्द ही उनके खिलाफ मामला दर्ज होने वाला है.

वीडियो कॉल पर ‘पुलिस' का नाटक

इसके बाद पीड़ित को व्हाट्सऐप पर कॉल आया. कॉल करने वाले ने पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल किया और भरोसा दिलाया कि अगर वे जांच में सहयोग करेंगे तो असली आरोपी पकड़े जा सकेंगे. ठगों ने यह भी कहा कि उन्हें पुलिस स्टेशन आने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ‘डिजिटल इंडिया' के तहत ई-इन्वेस्टिगेशन चल रही है.

पीड़ित को बताया गया कि वे अब “डिजिटली अरेस्ट” हैं और किसी भी रिश्तेदार को इस बारे में कुछ नहीं बता सकते. डर और मानसिक दबाव में आकर बुजुर्ग ने अपनी बैंक डिटेल, बैलेंस, म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट और एफडी से जुड़ी सारी जानकारी साझा कर दी.

सुप्रीम कोर्ट और RBI का नाम लेकर धमकाया

ठगों ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और RBI के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजने का दावा किया. कहा गया कि अगर इस केस से बाहर निकलना है तो म्यूचुअल फंड, शेयर और एफडी की पूरी रकम कोर्ट में जमा करनी होगी, जो जांच पूरी होने पर ब्याज सहित वापस मिल जाएगी.

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इसी डर में आकर पीड़ित ने अपने निवेश भुनाए और 1 दिसंबर से 17 दिसंबर 2025 के बीच अलग-अलग तारीखों में RTGS के जरिए कुल 9 करोड़ रुपये विभिन्न बैंकों (ICICI, IndusInd, Axis, Yes Bank) के खातों में ट्रांसफर कर दिए.

बैंक कर्मचारी की सतर्कता से खुला मामला

22 दिसंबर 2025 को ठगों ने पीड़ित से एक और खाते में 3 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराने को कहा. जब पीड़ित बैंक ऑफ इंडिया की गिरगांव शाखा पहुंचे, तो बैंक कर्मचारियों ने ट्रांजैक्शन रोक दी और उनके रिश्तेदारों को बुलाने को कहा. तब जाकर परिवार को पूरे मामले की जानकारी मिली और ठगी का खुलासा हुआ. इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई.

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पुलिस में शिकायत

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले इंस्पेक्टर दीपक शर्मा (मोबाइल नंबर +91 8945573831) और उसके साथियों ने झूठे आरोप, गिरफ्तारी का डर और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर उनसे 9 करोड़ रुपये की ठगी की. उन्होंने सभी संबंधित बैंक खाताधारकों और रकम के लाभार्थियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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