ड्रग्स मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई, मुंबई में 5.88 करोड़ की कीमत के 7 फ्लैट्स अटैच

मुंबई में ड्रग्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने PMLA के तहत फैसल शेख, अल्फिया शेख और अन्य के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लगभग ₹5.88 करोड़ मूल्य की 7 अचल संपत्तियां (फ्लैट आदि) अस्थायी रूप से अटैच कीं.

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आरोपियों ने अपने और सहयोगियों के नाम पर फर्में भी खोल रखी थीं.
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  • ED ने ड्रग्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 5.88 करोड़ मूल्य की सात अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की
  • फैसल शेख और अल्फिया शेख ने मेफेड्रोन ड्रग्स की सप्लाई के लिए एक संगठित नेटवर्क बनाया था
  • आरोपियों ने ड्रग्स से कमाए गए नकद पैसे को निजी खातों और फर्जी कंपनियों के माध्यम से वैध दिखाने की कोशिश की थी
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मुंबई:

मुंबई में ड्रग्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए PMLA के तहत फैसल शेख, अल्फिया शेख और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में 5.88 करोड़ की कीमत की 7 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं. यह कार्रवाई ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने NDPS केस में की है.

 NCB की शिकायत पर शुरू हुई जांच, ‘MD' सप्लाई का नेटवर्क 

यह केस NCB मुंबई की शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था, जो NDPS एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज है. जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी फैसल शेख प्रतिबंधित ड्रग मेफेड्रोन (MD) की खरीद कुख्यात ड्रग तस्कर सलीम डोला से करता था. फैसल शेख और उसकी पत्नी अल्फिया शेख ने MD ड्रग्स की सप्लाई के लिए एक संगठित नेटवर्क बनाया हुआ था. यह ड्रग्स सामिया खान, नासिर यासीन खान, अजीम अबू सलीम खान उर्फ अजीम भाऊ जैसे लोगों को बेची जाती थीं, जो आगे अपने ग्राहकों तक पहुंचाते थे.

कैश को वैध दिखाने की कोशिश, निजी खाते और फर्जी फर्में

जांच में यह भी सामने आया कि फैसल और अल्फिया शेख ड्रग्स की बिक्री से कमाए गए नकद पैसे को अपने निजी बैंक खातों में जमा करते थे, ताकि उसे कानूनी कमाई के रूप में दिखाया जा सके. आरोपियों ने अपने और सहयोगियों के नाम पर फर्में भी खोल रखी थीं. इनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था, बल्कि इन्हें ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' को घुमाने और सफेद दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

शेल कंपनियों और कई खातों से ‘रूटिंग'—फ्लैट्स की खरीद

ईडी के मुताबिक, ड्रग्स से कमाए गए कैश का कुछ हिस्सा फैसल और अल्फिया अपने करीबी सहयोगी फैजान मोहम्मद शफ़ी शेख को देते थे. उसने अपनी प्रोप्रायटरशिप फर्म ‘Faiz Impex, मुंबई' और अन्य सहयोगियों के जरिए यह रकम कई बैंक खातों और शेल कंपनियों में घुमाई. इस रकम का एक हिस्सा बाद में मुख्य आरोपियों और उनके परिवार के खातों में वापस लाया गया और उसी पैसे से अचल संपत्तियां खरीदी गईं.

पहले की जब्ती: नकद, सोना, लग्जरी कारें और खाते

इससे पहले 8 अक्टूबर 2025 को ईडी ने PMLA के तहत छापेमारी की थी. उस दौरान ₹42 लाख नकद, करीब 1.6 किलोग्राम सोने के गहने (लगभग ₹1.76 करोड़ कीमत), 3 सेकेंड‑हैंड लग्ज़री गाड़ियाँ (लगभग ₹56 लाख कीमत), 12 बैंक खाते जब्त या फ्रीज किए गए थे. 

फ्लो‑चार्ट तैयार, आगे की जांच जारी

ईडी के अनुसार, फैसल और अल्फिया शेख द्वारा तैयार किया गया मनी‑ट्रेल नेटवर्क काफी सुनियोजित था, जिसका पूरा फ्लो‑चार्ट एजेंसी ने तैयार कर लिया है. फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है. यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि ड्रग्स के धंधे से कमाए गए पैसे को छिपाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का जाल कैसे बिछाया जाता है, हालांकि जांच एजेंसियाँ लगातार ऐसे नेटवर्क पर शिकंजा कस रही हैं.

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