अमर कॉलोनी से ग्रेटर कैलाश तक, क्यों दिल्ली के पॉश इलाके घरेलू सहायकों के सॉफ्ट टारगेट बन रहे हैं

दिल्ली के पॉश इलाकों में घरेलू सहायकों द्वारा क्राइम के मामले काफी बढ़ गए हैं. आखिर घर में काम करने वाले भरोसे के लोग ही कैसे अपराधी बन जाते हैं?

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  • दिल्ली के अमर कॉलोनी में IRS अधिकारी की बेटी की हत्या का आरोपी पूर्व नौकर राहुल मीणा पाया गया था
  • आरोपी ने सुबह घर पहुंचकर यौन उत्पीड़न के बाद मोबाइल चार्जर की तार से हत्या की थी
  • दिल्ली में घरेलू सहायकों द्वारा चोरी, लूट और हत्या के मामले पिछले वर्षों में तेजी से बढ़े हैं
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राजधानी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में IRS अधिकारी की 22 साल की बेटी के मर्डर में कई दिल दहला देने वाले खुलासे हुए हैं. इस मामले में पूर्व नौकर राहुल मीणा की हत्यारा निकला. राहुल को घर के बारे में पूरी जानकारी थी. वो सुबह-सुबह घर पहुंचा और लड़की के साथ यौन उत्पीड़न किया और मोबाइल चार्जर की तार से उसकी हत्या कर दी. इस वारदात से एक दिन पहले ही आरोपी ने अलवर में भी एक शादीशुदा महिला के साथ रेप किया था. दिल्ली में पिछले कुछ सालों में इस तरह के मामले बढ़ गए हैं. लाजपत नगर, जीके और अमर कॉलोनी जैसे इलाकों में बुजुर्गों और महिलाओं के खिलाफ घरेलू सहायकों के अपराधों का एक पैटर्न रहा है. आइए जानते हैं कब-कब ऐसे मामले सामने आए हैं.

कब कब आए ऐसे मामले?

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच घरेलू सहायकों द्वारा चोरी और लूट के 750 से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें लगभग 650 गिरफ्तारियां हुईं. 

  • जुलाई 2025 (लाजपत नगर): घरेलू सहायक मुकेश ने पैसों के विवाद और मालकिन की डांट से नाराज होकर रुचिका सेवानी और उनके 14 वर्षीय बेटे की गला रेतकर हत्या कर दी थी. 
  • मई 2024 (ग्रेटर कैलाश): एक डॉक्टर की घरेलू सहायक और उसके साथियों ने लूट के इरादे से डॉक्टर को बंधक बनाया और उनकी हत्या कर दी.
  • जुलाई 2021 (वसंत विहार): पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. रंगराजन कुमारमंगलम की पत्नी की उनके धोबी और साथियों ने लूट के लिए गला घोंटकर हत्या कर दी थी.
  • जुलाई 2014 (ग्रेटर कैलाश-II): एक घरेलू सहायक ने 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर उनकी हत्या की थी.

क्यों बढ़ रहे ऐसे क्राइम?

दिल्ली जैसे शहर में इस तरह के अपराध बढ़ने के कई कारण हैं. पहला तो यही है कि लोग कई बार कम पैसों के चक्कर में बिना पुलिस वैरिफिकेशन के ही घरेलू सहायकों को रख लेते हैं. कई परिवार सालों से काम कर रहे नौकरों या किसी पुराने परिचित के कहने पर आए पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते. वेरिफिकेशन न होने के कारण वारदात के बाद अपराधी को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. वहीं लोग घरेलू सहायकों पर भरोसा करके पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं. धीरे-धीरे उन्हें घरवालों का पूरा रूटीन पता होता है. घर में आने से लेकर जाने तक के सभी रास्ते, सामान, पैसे और गहने तक के ठिकाने पता लग जाते हैं. इन इलाकों में बड़ी कोठियां, महंगी गाड़ियां और अन्य रॉयल जीवन अपराधियों को आकर्षित करता है. पॉश इलाकों में 'पड़ोसी धर्म की कमी होती है. लोग एक-दूसरे को कम जानते हैं. ऐसे में घर के अंदर क्या चल रहा है, इसका बाहर किसी को आभास नहीं होता. 

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अमर कॉलोनी कांड में चौंकाने वाले खुलासे

दिल्ली के अमर कॉलोनी मर्डर केस में भी ऐसे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. आरोपी राहुल को घर के बारे में पूरी जानकारी थी. वो जानता था कि सुबह के वक्त लड़की अकेली होती है. वह यह भी जानता था कि फ्लैट की चाबी कहां छिपाकर रखी गई है. आरोपी ने चाबी से दरवाजा खोला और अंदर घुस गया. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी करीब 40 मिनट तक फ्लैट में रहा और फिर पास के जंगल के रास्ते से फरार हो गया. IRS अधिकारी ने ऑफिस के एक साथी के रेफरेंस पर करीब एक साल पहले इस नौकर को काम पर रखा था.

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