- दिल्ली में IRS अधिकारी की बेटी के रेप और हत्या के मामले ने देश में महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं
- प्रियदर्शिनी मट्टू केस में आरोपी संतोष सिंह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का बेटा था और पहले बरी कर दिया गया था
- संतोष को बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदला
दिल्ली में हाल ही में IRS अधिकारी की बेटी के रेप और मर्डर केस ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है. यह मामला सामने आते ही लोगों के जेहन में 1996 का वह खौफनाक कांड फिर उभर आया, जब दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ छात्रा प्रियदर्शिनी मट्टू के साथ रेप और हत्या ने पूरे सिस्टम पर भरोसा डगमगा दिया था. दो अलग‑अलग दौर, लेकिन सवाल वही कि मौजूदा दौर में भी महिला के खिलाफ हो रहे जघन्य अपराधों पर लगाम क्यों नहीं लग रही है.
प्रियदर्शिनी मट्टू केस क्या है, जब पूरा देश सन्न रह गया था
प्रियदर्शिनी मट्टू का मामला 30 साल पुराना है, लेकिन उसकी गूंज आज भी लोगों को सुनाई देती है. श्रीनगर में स्कूलिंग और जम्मू से बीकॉम करने के बाद प्रियदर्शिनी उर्फ प्रिया दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई कर रही थीं. यहीं उसके पीछे संतोष नाम का सीनियर छात्र पड़ गया, जो लगातार उन्हें प्रपोज करता रहा. मगर बार‑बार मना करने और पुलिस शिकायत के बावजूद पीछा नहीं रुका. शिकायत के बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षाकर्मी भी दिया था और आरोपी को चेतावनी दी गई थी. लेकिन 23 जनवरी 1996 को वही हुआ, जिसका लोगों को डर था. संतोष घर में दाखिल हुआ. कुछ ही घंटों बाद प्रिया का शव खून से लथपथ हालत में मिला. जांच में सामने आया कि हीटर के तार से गला घोंटकर उसकी हत्या की गई थी.
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रसूख और सिस्टम की नाकामी
आरोपी संतोष सिंह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का बेटा था. शुरुआती जांच में रेप की पुष्टि तक नहीं हुई और 1999 में ट्रायल कोर्ट ने उसे बरी कर दिया. इस फैसले ने पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ा दी, लोगों को लगा कि कानून अमीर और ताकतवर के आगे बेबस है. लोगों के दबाव के बाद सीबीआई ने अपील की और 2006 में दिल्ली हाईकोर्ट ने संतोष सिंह को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई. कोर्ट ने जांच में हुई गंभीर लापरवाहियों की ओर भी इशारा किया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. इंसाफ जरूर मिला, लेकिन करीब डेढ़ दशक के लंबे संघर्ष के बाद.
आज फिर वही बहस, वही बेचैनी
अब, IRS अधिकारी की बेटी की हत्या के ताजा मामले ने यह बहस फिर छेड़ दी है कि क्या सिस्टम वाकई बदल पाया है. क्या रसूख वाले मामलों में कानून अब भी उतना ही सुस्त है, जितना प्रियदर्शिनी मट्टू के दौर में था? हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा संतोष सिंह की समय से पहले रिहाई की याचिका पर की गई टिप्पणियों ने भी एक बार फिर लोगों की भावनाएं झकझोर दी हैं.
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गुनहगार कहां है आज?
प्रियदर्शिनी मट्टू केस में दोषी संतोष सिंह आज उम्रकैद की सजा काट रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने 1996 के प्रियदर्शनी मट्टू हत्याकांड में दोषी संतोष कुमार सिंह को दी गई पैरोल की अवधि न बढ़ाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि छूट से संबंधित मुख्य मामला पहले से ही दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है और 18 मई को इसकी सुनवाई होनी है.














