कैसे बनी फर्जी ED टीम? यूनिफॉर्म से आईकार्ड तक सब नकली… दिल्ली की कोठी में रेड की साजिश कैसे रची गई

दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में फर्जी ED रेड का खुलासा हुआ, जहां पैरामिलिट्री की नकली वर्दी, फर्जी आईडी और बैज बनाकर ठगों ने कोठी में दाखिल हुए. मेड और उसकी ननद इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड निकलीं.

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इस फर्जी रेड की नींव ही फर्जी पहचान और विश्वास हासिल करने पर टिकी थी.
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  • दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में मेड और उसकी ननद ने मिलकर ED की फर्जी रेड करा दी
  • फर्जी डिप्टी कमांडेंट की वर्दी, आईडी और बैज मनीष ने बनवाए जो पैरामिलिट्री फोर्स में पूर्व कांस्टेबल रह चुका था
  • फर्जी टीम ने घर में घुसकर वीडियोग्राफी की, तलाशी ली और कीमती सामान और नकदी भी जब्त की
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नई दिल्ली:

दिल्ली के पॉश एरिया न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में सुबह 10.30 बजे एक कोठी पर फर्जी ED रेड डालने की वारदात सामने आई है. यह पूरा मामला इसलिए चौंकाता है क्योंकि रेड डालने वाले न केवल असली ED की तरह वर्दी और आईडी लेकर पहुंचे, बल्कि घर में घुसकर वीडियोग्राफी की, तलाशी और सामान ले जाने तक पूरा ड्रामा किया. बाद में पता चला कि पूरा प्लानिंग घर की मेड और उसकी ननद ने मिलकर की थी.

आखिर कैसे बनी फर्जी डिप्टी कमांडेंट की वर्दी और आईडी

इस वारदात को अंजाम देने के लिए सबसे अहम थे फर्जी आईडी, वर्दी और बैज, जिन्हें पूरी प्लानिंग के साथ तैयार किया गया. मेड रेखा देवी की ननद पूजा राजपूत का पति मनीष पहले पैरामिलिट्री फोर्स में कांस्टेबल रह चुका था. यही मनीष इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड बना. जानकारी के मुताबिक मनीष ने ही डिप्टी कमांडेंट की वर्दी तैयार करवाई, फर्जी बैज और फर्जी आईकार्ड बनवाया. उसके पास एक पिस्टल भी थी, जिसका लाइसेंस 2019 में खत्म हो चुका था. इसी वर्दी और आईडी के दम पर उसने घर का गेट खुलवाया और खुद को ED अधिकारी बताया.

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यानी इस फर्जी रेड की नींव ही फर्जी पहचान और विश्वास हासिल करने पर टिकी थी. रेखा देवी और उसकी ननद ने दिया. घर के भीतर की जानकारी देने का काम सब्बरवाल परिवार की मेड रेखा देवी ने किया. दो साल से घर में काम करने के कारण उसे परिवार की दिनचर्या, घर में रखे कीमती सामान, तलाशी का सही समय, कौन–किस वक्त घर पर होगा. इस बारे में सबकुछ पता था.

रेखा देवी ने ये पूरी जानकारी अपनी ननद पूजा राजपूत को दी. इसके बाद पूजा और मनीष ने मिलकर रेड की पूरी प्लानिंग तैयार की. मनीष अपने साथ अपने दोस्त उपदेश थापा और उसके बेटे को भी लेकर आया. फर्जी रेड के वक्त रेखा देवी खुद घर में मौजूद थी ताकि किसी का भी शक उस पर ना जाएं.

फर्जी रेड की स्क्रिप्ट: तलाशी, वीडियोग्राफी और सामान की लूट

सुबह 10.30 बजे तीन लोग नीले रंग की बोलेरो से पहुंचे. एक ने वर्दी पहनी, खुद को डिप्टी कमांडेंट बताया. दूसरे ने वीडियोग्राफी शुरू की, जैसे असली रेड में होती है. वहीं तीसरा अलमारी से कैश और ज्वैलरी निकालने लगा. वे पूरी तैयारी के साथ आए थे. घरवालों के मोबाइल तुरंत अपने कब्जे में ले लिए. 5–7 लाख कैश, कीमती ज्वैलरी और महंगी घड़ियाँ इकट्ठी करनी शुरू कर दीं.

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अंग्रेजी बोलकर पूरा माहौल असली जैसा बनाया

रेड के दौरा अंग्रेजी बोलकर बिल्कुल असली सिचुएशन क्रिएट की. लेकिन उन्हें पता नहीं था कि ऊषा सब्बरवाल का एक दूसरा फोन भी घर में मौजूद था. ऊषा सब्बरवाल बाथरूम जाने के बहाने से गईं और अपने पोते गौरव को कॉल किया. जो ED के वकील हैं. गौरव ने तुरंत कहा कि यह टीम फर्जी है. जैसे ही ऊषा सब्बरवाल ने फर्जी अधिकारियों को बताया कि उनका पोता, जो ED का वकील है, रास्ते में है. इन तीनों को पकड़े जाने का डर सताने लगा.वे जल्दबाज़ी में 3–4 लाख कैश
7 महंगी घड़ियां, कुछ ज्वैलरी लेकर मौके से फरार हो गए.

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CCTV फुटेज से मिली गाड़ी और पहुंच गई पुलिस मास्टरमाइंड तक

इस फर्जी रेड की सबसे अहम कड़ी बनी नीली बोलेरो बनी. डिजिटल फुटप्रिंट खंगालते हुए पुलिस ने करीब 3000 से ज्यादा CCTV कैमरों को स्कैन किया. सरिता विहार की अतिरिक्त DCP ऐश्वर्या शर्मा के अनुसार कार की लोकेशन वैशाली सेक्टर-4 में मिली, पुलिस वहां पहुंची तो पूजा राजपूत मिली. पूछताछ में उसने पूरी सच्चाई कबूल ली. हालांकि मनीष, उपदेश और उसका बेटा अब भी फरार हैं.

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