Vaibhav Sooryavanshi vs Sachin Tendulkar in Duleep Trophy: वैभव सूर्यवंशी ने 92 रन की आक्रामक पारी खेलकर लाल गेंद के क्रिकेट में अपनी काबिलियत का प्रदर्शन किया लेकिन दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल के दूसरे दिन सोमवार को पूर्व क्षेत्र की टीम मध्य क्षेत्र पर पहली पारी की बढ़त हासिल करने में नाकाम रही. बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे (66 रन पर चार विकेट) और तेज गेंदबाज यश ठाकुर (66 रन पर तीन विकेट) तथा आर्यन पांडे (43 रन पर तीन विकेट ) ने पूर्व क्षेत्र के सभी 10 विकेट आपस में साझा किये जिससे पूर्व क्षेत्र की पूरी टीम 266 रन पर सिमट गई.इस तरह दोनों टीमों का पहली पारी का स्कोर बराबर रहा, क्योंकि मध्य क्षेत्र ने भी अपनी पहली पारी में 266 रन बनाए थे. दिन का खेल खत्म होने तक मध्य क्षेत्र ने तीन विकेट पर 45 रन बना लिये थे. दिन का खेल खत्म होते समय अमन मोखाड़े (23) और आर्यन पांडे (04) क्रीज पर मौजूद थे. स्टंप्स से कुछ मिनट पहले तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने मध्य क्षेत्र के कप्तान रजत पाटीदार को आउट कर बड़ा झटका दिया.
पंद्रह साल के सूर्यवंशी ने इस दौरान दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक जड़ने वाला सबसे कम उम्र का बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया. उन्होंने 1969 में 16 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाले लक्ष्मण सिंह का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज की पारी की खासियत महज यह रिकॉर्ड नहीं था. 118 मिनट और 81 गेंदों तक चली उनकी पारी शुरुआत से ही पूरी तरह सहज नहीं दिखी लेकिन बिहार के इस युवा बल्लेबाज ने शानदार धैर्य और जुझारूपन दिखाते हुए बल्लेबाजी जारी रखी. उन्हें 40 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान भी मिला जब सारांश जैन की गेंद पर यश राठौड़ ने बैकवर्ड प्वाइंट पर आसान कैच टपका दिया.
इस एक मौके को छोड़ दें तो सूर्यवंशी ने गेंदबाजों पर जमकर हमला बोला और कई शानदार शॉट लगाए। उनके आक्रमण की शुरुआत तेज गेंदबाज यश ठाकुर के खिलाफ मिडविकेट के ऊपर से लगाए गए जोरदार छक्के से हुई। इस छक्के के अलावा उसी स्पेल में उन्होंने ठाकुर की गेंदों पर चार चौके भी जड़े. ठाकुर ने इससे निपटने के लिए गेंदबाजी छोर में बदलाव किया लेकिन इसका भी खास फायदा नहीं मिला.
ठाकुर के बाद सूर्यवंशी ने बाकी गेंदबाजों को भी उसी आक्रामक अंदाज में निशाना बनाया. भारतीय ऑफ स्पिनर जैन की गेंद को उन्होंने मिडविकेट के ऊपर से छक्के के लिए भेज कर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना दूसरा अर्धशतक पूरा किया. इसके बाद हर्ष दुबे और आर्यन पांडे की गेंदों पर भी उन्होंने छक्के लगाए. एक और छक्के के बाद चौका जड़ते ही सूर्यवंशी ने 90 का आंकड़ा पार कर लिया.
वैभव हालांकि प्रथम श्रेणी में अपने पहले शतक से चूक गये. दुबे की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में लगाया गया स्लॉग-स्वीप डीप मिडविकेट पर तैनात अरशद खान के हाथों में चला गया. पवेलियन लौटते समय वैबव सूर्यवंशी के चेहरे पर निराशा साफ थी. उन्हें अहसास था कि वह शतक बनाने का सुनहरा मौका गंवा चुके हैं.
सचिन का रिकर्ड बच गया
शतक न बना पाने का मतलब यह भी था कि वैभव सूर्यवंशी भारत के सबसे कम उम्र में फर्स्ट-क्लास शतक लगाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में सचिन तेंदुलकर से आगे नहीं निकल पाए. तेंदुलकर ने 1988 में रणजी ट्रॉफी मैच में 15 साल और 230 दिन की उम्र में अपना पहला फर्स्ट-क्लास शतक लगाया .वैसे भारत की ओर से ध्रुव पांडोवे सबसे कम उम्र में फर्स्ट-क्लास शतक लगाने वाले भारतीय बने हुए हैं; उन्होंने 1988 में 14 साल और 293 दिन की उम्र में यह कारनामा करने में सफल रहे थे.
शतक के बहुत करीब पहुंचकर भी उसे न बना पाने के बावजूद, सूर्यवंशी की 92 रन की पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनमें फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में तेज़ी से रन बनाने की काबिलियत है.भले ही आउट होने की वजह से वे ऐतिहासिक शतक नहीं बना पाए, लेकिन इस युवा खिलाड़ी ने अपने नाम दिलीप ट्रॉफी का एक रिकॉर्ड जरूर दर्ज करा लिया.
हालांकि, अपनी पारी के दौरान सूर्यवंशी एक रिकॉर्ड बनाने में कामयाब रहे; वह दिलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए. लेकिन वह शतक से आठ रन दूर रह गए. हर्ष दुबे की गेंद पर डीप मिड-विकेट बाउंड्री के ऊपर से शॉट मारने की कोशिश में वह बाउंड्री पर खड़े फील्डर के हाथों कैच आउट हो गए.
(भाषा के इनपुट के साथ)
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