T20 World Cup 2026: वर्ल्ड कप में गुरुवार को इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल (Ind vs Eng Semi Final) मुकाबले में स्लॉग ओवरों में दो ओवरों में सिर्फ 14 रन देकर टीम इंडिया की जीत में बहुत ही अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह (jasprit Bumrah) का नाम एकदम से करोड़ों फैंस की जुबां पर चढ़ गया है. मीडिया से लेकर तमाम पूर्व दिग्गज उनकी शान में कसीदे काढ़े रहे हैं. बुमराह से जुड़े और किस्से और कहानियां भी सामने आ रहे हैं. रणजी ट्रॉफी में बुमराह के साथ खेलने वाले प्रियांक पंचाल को आज भी अच्छी तरह याद है कि किशोरवय में जसप्रीत बुमराह स्कूल के क्रिकेट के दिनों में अपनी तेज और खतरनाक बाउंसर गेंदों के लिए मशहूर थे और बल्लेबाज उनसे खौफ खाते थे. भारत ए और गुजरात के पूर्व कप्तान पंचाल ने उन दिनों को याद करते हुए देश के सबसे महान तेज गेंदबाज के शुरुआती दिनों की बात की जो वर्तमान मं भारत के इस हिस्से से सबसे बड़े क्रिकेट ‘आइकॉन' हैं.
पंचाल ने कहा, ‘मैं जस्सी (बुमराह) से कुछ साल सीनियर था और जब तक वह गुजरात टीम में आया, मैं पहले से ही रणजी ट्रॉफी खेल रहा था. लेकिन जैसा कि किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे के साथ होता है, हमने सुना कि यह किशोर स्कूल क्रिकेट में धूम मचा रहा है.' उन्होंने कहा, ‘उन दिनों स्कूल टूर्नामेंट कृत्रिम मैट पर खेले जाते थे तो गेंद प्राकृतिक टर्फ पिचों की तुलना में तेजी से जाती थी. लेकिन स्कूल स्तर पर, आप 15-16 साल के लड़कों को अपनी उम्र के दूसरे लड़कों को लगातार और सटीक बाउंसर से डराते हुए नहीं सुनते. रणजी में पदार्पण करने से पहले ही उसकी गेंदबाजी का रुतबा था.' लेकिन बुमराह के साथ पंचाल की पहली बातचीत तब हुई जब गुजरात रणजी ट्रॉफी सत्र से पहले सत्र पूर्व दौर पर पुणे गया था.
उन्होंने कहा, ‘हालांकि मेरे और उसके बीच उम्र का अंतर था, लेकिन वह मेरे सबसे अच्छे ‘रूममेट्स' (कमरा साझा करने वालों) में से एक था. वह शांत लड़का था, जो सिर्फ कड़ी मेहनत में यकीन रखता था. अगर वह आपको दोस्त मानता है और आपसे खुलकर बात करता है तो उसका साथ मजेदार है.' पंचाल ने कहा, ‘जब उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उनके गेंदबाजी एक्शन में एक जबरदस्त बाउंसर, एक असरदार इनस्विंगर थी और यॉर्कर भी अच्छी हो रही थी. उस समय उनके एक्शन में आउटस्विंगर नहीं थी. उन्होंने इस पर काम करते हुए इसे सीखा.घंटों के अभ्यास, तकनीक की समझ और इसे ठीक करने की वजह से अब वह आउटस्विंगर के भी मास्टर बन गए हैं.'
पंचाल ने बताया, ‘अगर आप देखें तो उनकी आउटस्विंग लेग-मिडिल लाइन से शुरू होती है और ऑफ-स्टंप पर खत्म होती है जिससे बल्लेबाज के लिए इसे खेलना बहुत मुश्किल हो जाता है.' उन्होंने कहा, ‘अगर मैं टेस्ट मैचों की बात करूं तो पहले ओवर और शायद दिन के आखिर में 16वें ओवर में गेंदबाजी करते समय भी उनके रफ्तार में कोई गिरावट नहीं होगी. यह इसलिए कि जस्सी कभी भी यह सोच के क्रिकेट नहीं खेलता कि ‘मुझको अपना शरीर बचाना है. उसने कभी भी अपने शरीर के चोटिल होने की परवाह नहीं की. उसके लिए चाहे मैच हो या अभ्यास, यह एक ही है, इसमें बीच का कोई रास्ता नहीं है.'














