टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत के हीरो और 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे संजू सैमसन ने कहा कि वह आज भी हर सुबह उठकर इस बात पर यकीन नहीं कर पाते कि टीम ने अपनी ही धरती पर यह ट्रॉफी जीती है. हालांकि, उन्हें पूरा यकीन है कि देश में जिस तरह से लगातार नए-नए टैलेंट सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए आने वाले सालों में भारत को और भी कई बार ट्रॉफी जीतने का मौका मिलेगा. रविवार को नई दिल्ली में बीसीसीआई अवॉर्ड्स के मौके पर ब्रॉडकास्टर्स से बात करते हुए सैमसन ने कहा, 'अभी भी मुझे यकीन नहीं हो रहा. जब मैं सुबह उठता हूं, तो सोचता हूं कि क्या सच में ऐसा हुआ है? सच कहूं तो मेरे मन में यही भावना है. हालांकि, मुझे लगता है कि आने वाले सालों में हमारे देश में जिस तरह के बेहतरीन खिलाड़ी मौजूद हैं उसे देखते हुए यह सिलसिला बार-बार दोहराया जाएगा. भारत में जिस तेजी से नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं वह निश्चित रूप से देश को और भी ज्यादा बार जीत दिलाएंगे.'
संजू सैमसन का प्रदर्शन टी20 वर्ल्ड कप 2026 में लाजवाब रहा. संजू को शुरुआती मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में खेलने का मौका नहीं मिला था. हालांकि, संजू हाथ आए हर मौके को भुनाने में सफल रहे। वेस्टइंडीज के खिलाफ 'करो या मरो मुकबाले में सैमसन ने 97 रनों की पारी खेलते हुए भारतीय टीम को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया. इसके बाद सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भी संजू ने 89 रनों की नाबाद पारी खेली. वहीं, फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी विकेटकीपर-बल्लेबाज ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 46 गेंदों में 89 रनों की नाबाद पारी खेली. टी20 विश्व कप में संजू ने सिर्फ 5 पारियों में 199 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 321 रन बनाए.
सैमसन ने आगे कहा, 'आप सिर्फ यह सपना देख सकते हैं कि आप कहां पहुंचना चाहते हैं, लेकिन आप उस रास्ते पर कैसे चलेंगे, यह आप तय नहीं कर सकते. इस मामले में मेरी जिंदगी और मेरा करियर एक बेहतरीन मिसाल है. मैं निश्चित रूप से कुछ साल पहले ही यह उपलब्धि हासिल करना चाहता था. मैं अपने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहता था, लेकिन किस्मत की अपनी ही योजना थी, अपनी ही कहानी थी. इसी कारण मुझे यह सब कुछ किसी फिल्म की तरह लगता है. मैंने इस पूरे सफर का भरपूर आनंद लिया.'
संजू सैमसन ने कहा कि शुरुआत में उनका पूरा ध्यान सिर्फ अपने प्रदर्शन पर था, खासकर न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के दौरान. हालांकि, अचानक उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. बाद में टीम को उनकी जरूरत महसूस हुई और उन्हें वापस बुलाकर योगदान देने के लिए कहा गया. इसी समय उनका सोचने का तरीका बदल गया.
उन्होंने कहा कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में ध्यान सिर्फ अपने प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि टीम की जरूरतों पर होता है. जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के समय उन्हें महसूस हुआ कि टीम को उनसे योगदान की उम्मीद है और उनकी टीम में एक खास भूमिका है. संजू ने कहा कि यही से उनके अंदर बदलाव आया और उनका आत्मविश्वास जागा कि टीम को उनकी जरूरत है. संजू ने बताया कि उन्होंने मानसिक और शारीरिक रूप से खुद पर काफी काम किया था, इसलिए उन्हें भरोसा था कि वह तैयार हैं. उन्हें बस वही करना था जो वह सबसे अच्छा कर सकते हैं.
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