'जब मैं टीम में कोच के तौर पर आया था तो सचिन तेंदुलकर खुश नहीं थे..' Gary Kirsten का चौंकाने वाला खुलासा

Gary Kirsten Sachin Tendulkar: गैरी कर्स्टन (Gary Kirsten) के कोच रहते भारत ने एम एस धोनी (MS Dhoni) की कप्तानी में साल 2011 में 28 साल के बाद विश्व कप (World Cup 2011) का खिताब जीता था.

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सचिन तेंदुलकर खुश नहीं थे, पूर्व भारतीय कोच गैरी कर्स्टन का खुलासा

Gary Kirsten Sachin Tendulkar: गैरी कर्स्टन (Gary Kirsten) के कोच रहते भारत ने एम एस धोनी (MS Dhoni) की कप्तानी में साल 2011 में 28 साल के बाद विश्व कप (World Cup 2011) का खिताब जीता था. धोनी और कर्स्टन (Gary Kirsten MS Dhoni) की जोड़ी ने मिलकर इतिहास रच दिया था. गैरी कर्स्टन को भारतीय टीम के लिए सबसे सफल कोच माना जाता है. बता दें कि ग्रेग चैपल के बाद जब कर्स्टन  को टीम इंडिया का कोच बनाया गया था तो उस समय टीम इंडिया कई तरह से विवाद से गुजर रही थी. गांगुली को कप्तानी से हटा दिया गया था, भारत 2007 के विश्व कप से पहले ही राउंड से बाहर हो गया था. इसके बाद धोनी को कप्तान बनाया गया था. वहीं, कर्स्टन  को टीम का नया कोच बनाया गया था. कर्स्टन  के कोच बनने के बाद भारतीय टीम ने विश्व क्रिकेट में नया इतिहास लिखा और आखिर में 2011 में विश्व कप का खिताब जीतने में सफलता पाई थी. 

वहीं, पूर्व भारतीय कोच कर्स्टन  ने एक बड़ा खुलासा सचिन तेंदुलकर के बारे में किया है. कर्स्टन ने स्पोर्ट्स पत्रकार एडम कॉलिन्स के साथ उनके यू-ट्यूब चैनल पर बात करते हुए कहा है कि 'जब मैं कोच बन रहा था तो उस समय सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) अपने करियर को लेकर खुश नहीं थे. अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, 'जब मैं कोच बनकर टीम इंडिया में आया था टीम के ड्रेसिंग रूम में कुछ ऐसे खिलाड़ी थे जो खुश नहीं थे. खासकर सचिन अपने करियर से खुश नहीं थे और वो संन्यास लेने के बारे में सोच रहे थे. टीम में डर का माहौल था'. 

'जब मैंने कोच के रूप में कार्यभार संभाला तो मेरे लिए सबसे जरूरी ये था कि टीम को एक ऐसे लीडरशिप की जरूरत है जो टीम को आगे ले जा सके. किसी भी कोच के लिए ये एक बड़ी चुनौती होती है, उस समय कई सारे लोग खुश नहीं थे और इसी वजह से हर एक को समझना काफी जरूरी था. उस दौरान सचिन को लगता था कि वो अपने करियर में आगे नहीं बढ़ पाएंगे और वो संन्यास के बारे में भी सोच रहे थे. मेरे लिए जरूरी था कि उनके पास जाऊं और उन्हें समझा सकूं,  उन्हें ये एहसास दिलाऊं कि अभी भी वो भारत के लिए काफी कुछ कर सकते हैं.'

भारतीय पूर्व कोच ने यू-ट्यूब पर धोनी के साथ अपने रिश्ते पर भी बात की और कहा कि, 'कोई भी कोच चाहेगा कि खिलाड़ियों का ऐसा  समूह लाया जाए तो खुद पर विश्वास करता है और टीम के लिए हर हाल में जीत चाहता हो. भारत एक कठिन जगह है जहाँ व्यक्तिगत सुपरस्टार के बारे में बहुत अधिक प्रचार किया जाता है और आप अक्सर अपनी व्यक्तिगत जरूरतों में खो जाते हैं.और धोनी इस बीच एक ऐसे क्रिकेटर थे जिनके अंदर मैंने लीडरशिप क्वालिटी देखी थी. इसके बाद मैंने और धोनी ने मिलकर एक मजबूत टीम बनानें की कोशिश की'. 

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बता दें कि 2011 के वर्ल्ड कप के बाद गैरी कर्स्टन ने भारतीय टीम के लिए कोचिंग पद को थोड़ दिया था. 2011 विश्व कप के फाइनल में भारत ने श्रीलंका को हराकर 28 साल के बाद दूसरी बार विश्व कप का खिताब जीतने में कामयाबी पाई थी. 

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