Indian Premier League 2026: अब जबकि अगले कुछ दिनों के भीतर ही इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) का 19वां संस्करण शुरू होने जा रहा है, तो पिछले कुछ सालों से चला रहा एक नियम फिर से निशाने पर आ गया है. यूं तो पहले भी रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों ने इंपैक्ट प्लेयर नियम की आलोचना की है, लेकिन अब मेगा इवेंट से पहले से पहले दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल ने भी इस पर उंगली उठा दी है. और अगर इसे संकेत माना जाए, तो यह एकदम साफ है कि इंपैक्ट प्लेयर नियम पूरे टूर्नामेंट के दौरान चर्चा में बने रहने जा रहा है.
अक्षर पटेल ने नियम की आलोचना करते हुए कहा, ‘मुझे यह पसंद नहीं है क्योंकि इससे उनके जैसे खिलाड़ियों (हरफनमौला) के विकास में बाधा आती है.' इस नियम के तहत टीमें मैच के किसी भी समय अपनी एकादश में किसी खिलाड़ी को सूचीबद्ध पांच खिलाड़ियों में से किसी एक से बदल सकती हैं. यह नियम 2023 में लागू हुआ था और कम से कम 2027 तक लागू रहेगा. रोहित ने 2024 में कहा था कि उन्हें यह रणनीतिक नियम पसंद नहीं है, क्योंकि इससे भारतीय क्रिकेट में ऑलराउंडर खिलाड़ियों के विकास में बाधा आती है, तो इसके अगले सत्र में हार्दिक ने कहा था कि टीम में किसी हरफनमौला को चुनना मुश्किल हो गया है. खासकर तब, जब तक कि वह बल्ले और गेंद दोनों से समान रूप से अच्छा न हो.
अक्षर ने ‘इम्पैक्ट प्लेयर' से जुड़े सवाल के जवाब में हंसते हुए कहा, ‘मुझे यह नियम पसंद नहीं है, क्योंकि मैं खुद एक ऑलराउंडर हूं. पहले हम इस भूमिका (बल्लेबाजी और गेंदबाजी) के लिए ऑलराउंडर चुनते थे. अब टीम प्रबंधन किसी खास बल्लेबाज या गेंदबाज को चुनता है. वे कहते हैं कि हमें ऑलराउंडर की क्या जरूरत है?.' उन्होंने कहा, ‘खुद एक ऑलराउंडर होने के नाते मुझे यह पसंद नहीं है, लेकिन साथ ही नियम तो नियम होते हैं. हमें उनका पालन करना होता है. व्यक्तिगत रूप से मुझे यह पसंद नहीं है.' अक्षर ने पिछले आईपीएल सत्र में केवल 204 गेंदें फेंकी थीं, जबकि उससे पिछले सत्र में उन्होंने 264 गेंदें फेंकी थीं. उन्होंने कहा कि यह ‘इम्पैक्ट प्लेयर' नियम के कारण नहीं था, बल्कि उंगली की चोट के कारण था, जो उन्हें आईपीएल से पहले परेशान कर रही थी.
अक्षर बोले, ‘मैंने ज्यादा गेंदबाजी नहीं की. यह ‘इम्पैक्ट प्लेयर' की वजह से नहीं था. मैं गेंद को स्पिन कराने के लिए जिस उंगली का इस्तेमाल करता हूं, वह चैंपियंस ट्रॉफी के बाद चोटिल (घाव) हो गई थी. यह घाव इतना बढ़ गया था कि मैं गेंद की सीम पर पकड़ नहीं बना पा रहा था. इसीलिए मैं सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही गेंदबाजी कर रहा था और अपनी उंगली का ध्यान रख रहा था. सात मैचों के बाद हालत बेहतर हुए और मैंने नियमित रूप से गेंदबाजी करना शुरू कर दिया.'














