दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लखनऊ के इकाना स्टेडियम में चौथे टी20 से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा, जब उप-कप्तान शुभमन गिल पैर में लगी चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो गए. पहले से ही फॉर्म की मुसीबत के मारे गिल के लिए ऐसे समय जोर का झटका है, जब विश्व कप की दिशा में आगे बढ़ते हुए यहां से (चौथे टी20 से पहले) सिर्फ 8 ही मैच बाकी हैं. गिल की फॉर्म को लेकर जहां उनकी टीम में वापसी के समय से ही सवाल हैं, तो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरुआती तीन मैचों में इन सवालों में और वजन और नया आयाम दे दिया है. बहरहाल, पूर्व क्रिकेटर और टीम इंडिया के सहायक कोच रहे संजय बांगड़ ने बताया है कि सीधी रहती गेंद गिल के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हैं और इसी वजह से उनका यह हाल हुआ है. लेकिन बांगड़ को इससे ज्यादा चिंता गिल के लगातार गिरते स्ट्राइक रेट है और यह सीधी रहती गेंदों के खिलाफ ही नीचे गया है.
जियो-स्टार पर बातचीत में बांगड़ ने गिल की तकनीकी खामी को विस्तार से बताते हुए कहा, 'गिल ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद खेलते समय सहज दिखते हैं, लेकिन स्टंप के सीध में रहती गेंदों के खिलाफ उनका प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा है.' पूर्व बैटिंग कोच ने कहा, 'शुरुआती दिनों में गिल का फुटवर्क बहुत ही सकारात्मक , लेकिन अगर आप पिछले करीब 28 मैचों में उनकी तीन-चार बाउंड्रियों को हटा दें, तो समस्या सीधी रहती गेंद बन चुकी हैं. सीधी रहती गेंदों के खिलाफ उनका स्ट्राइक-रेट खासा गिर गया है.' बांगड़ ने गिल को अपने फुटवर्क पर काम करने की सलाह दी.
उन्होंने कहा, 'ऑफ स्टंप के बाहर गिल का स्ट्राइक-रेट अच्छा है, लेकिन उनके बल्ले से बाहरी और अंदरुनी किनारों से शॉट निकले हैं. कुल मिलाकर उन्होंने रन बनाए हैं, लेकिन सीधी रहती गेंदों पर गिल को सुधार की जरूरत है. दूसरे टी2- मैच में जिस पर आउट हुए, वह बहुत ही अच्छी गेंद थी. इस गेंद पर कोई भी बल्लेबाज चोटिल हो सकता था. गिल के फुटवर्क में सुधार हुआ है और अगर वह स्पष्ट रूप से लगातार फुटवर्क में सुधार जारी रखते हैं, तो गिल ठीक वही शॉट नियमित रूप से खेलने में सफल रहेगे, जो तीन-चार शॉट हम देख चुके हैं.'
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