IND vs ENG 2nd Semi-Final: टीम इंडिया का धमाल, कप्तान सूर्या के 5 फैसले कमाल, भारतीय कप्तान की हो रही वाह-वाह

India vs England, 2nd Semi-Final: यह टी20 फॉर्मेट का मानो अभी तक का चरमकाल है! भारत और इंग्लैंड सेमीफाइनल इसका सबसे बडा उदाहरण हैं. और यह मैच साफ कह गया कि जीत सिर्फ और सिर्फ बल्ला भांजने भर से नहीं ही मिलेगी. कप्तानी में सटीक फैसले भी लेने अनिवार्य हैं

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ICC Men's T20 World Cup 2026: सूर्यकुमार का बल्ला भले ही खामोश हो, लेकिन वह कप्तानी में फैसलों से बड़ा अंतर पैदा कर रहे हैं
X: soial Media

T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप में गुरुवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड (India vs England, 2nd Semi-Final) के बीच खेला गया दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला इतिहास के सुनहरे पन्रों में दर्ज हो गया. वर्ल्ड कप में खेले जाने वाले तीन नॉकआउट मैचों के इतिहास का अभी तक का सबसे रोमांचक मुकाबला! इसके रोमांच ने लोगों को पूरी तरह तर कर दिया. और मैच खत्म होने के कई घंटे बाद भी इसका बड़ा अंश अभी भी लोगो के भीतर बचा हुआ है. बातें अभी भी हो रही हैं. वास्तव में ये बातें हमेशा ही होंगी. इस मुकाबले की एक नहीं, बल्कि कई पहलुओं से मिसाल दी जाएगी. और  इसमें भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव की कप्तानी भी एक बड़ा पहलू है. सांसें रोक देने वाले मुकाबले में सूर्यकुमार यादव ने जैसे बड़े, साहसी और इससे ऊपर जिस टाइमिंग पर फैसले लिए, वह भारत की जीत में अपने आप में बहुत ही बड़ा अंतर पैदा कर गया. इन फैसलों की बातें हो रही हैं. सूर्य की कप्तानी और इन फैसलों की जमकर वाह-वाह हो रही है. 

1. चट बुलावा, पट  विकेट!

सूर्यकुमार का करो या मरो की जंग में पहला बड़ा फैसला पावर-प्ले यानी शुरुआती 6 ओवरों में बुमराह को पांचवां ही ओवर थमाना रहा. यह इससे पहले टूर्नामेंट में बहुत ही कम या न के बराबर देखी गई 'तस्वीर' रही, लेकिन इससे ऊपर बात यह है कि यह फैसला कितना सटीक साबित हुआ कि बुमराह ने पहले ही गेंद पर प्रचंड फॉर्म में रहे और सुपर-8 राउंड में तूफानी शतक बनाने वाले हैरी ब्रूक को चलता किया. ब्रूक का आउट होना भारत के लिए बहुत ही बड़ी कामयाबी और बड़ा अंतर पैदा करने वाली बात रही और इसके लिए सूर्या की वाह-वाही हो रही है. 

2. दुबे जी छब्बे बनकर लौटे!

हालांकि, यह फैसला प्रबंधन का था, लेकिन इसमें कप्तान एक अहम हिस्सा होता है. पूरी प्लानिंग कप्तान को केंद्र में रखकर होती है. ऐसे में टूर्नामेंट में जब भारत कुल मिलाकर आठवां मैच खेल रहा था. खास तौर पर करो या मरो का मुकाबला, तब सूर्या ने लेफ्टी शिवम दुबे को नंबर चार पर भेजकर हैरी ब्रूक को हक्का-बक्का कर दिया. हैरान तमाम पंडित भी थे और इसकी वजह थे लेग स्पिनर आदिल राशिद. यूं तो आदिल लेग स्पिनर थे, लेकिन उनकी गेंद दुबे के लिए ऑफ स्पिन थीं और ऐसे में इस फैसले के पीछे स्पिन के घुमाव के साथ बड़े शॉट लगाने की रणनीति थी. इसके लिए एक लेफ्टी बल्लेबाज जरूरी थी. सूर्या ने बिग हिटर दुबे पर दांव लगाया, तो वह छब्बे  बनकर लौटे. सिर्फ 25 गेंदों पर 4 चौकों और 2 छक्कों  से 43 रन बनाए, तो ये रन भारत की जीत में बहुत ही अहम साबित हुए. और फैसला सौ फीसद क्लिक कर गया. 

3. तिलक को बना दिया रिंकू!

इस टीम सूर्यकुमार की यही सबसे बड़ी खासियत है कि यहां एक बल्लेबाज जरूरत के हिसाब से अलग-अलग भूमिकाएं निभाने के लिए तैयार है. तिलक वर्मा पहले कई मौकों पर खुद को नंबर-3, नंबर-4  पर साबित कर चुके हैं, लेकिन गुरुवार को करो-मरो की जंग में कप्तान सूर्यकुमार ने उन्हें रिंकू सिंह बना दिया! मतलब तिलक को नंबर-7 पर एक तरह से फिनिशर की जिम्मेदारी दी! यहां जब टीम इंडिया पहले बैटिंग कर रही थी, तो तिलक पर जिम्मेदारी स्कोर को 'फिनिशिंग टच' देने की थी. और क्या कमाल का कैमियो निभाया तिलक ने! सिर्फ 7 गेंदों के भीतर 3 छक्कों से 21 रन बनाए तिलक ने . सिर्फ 7 रन से मिली जीत को देखते हुए यह योगदान बहुत ही ज्यादा अहम है, तो तिलक को 'फिनिशर' बनाने के लिए यादव भी इतने ही श्रेय के हकदार हैं. 

4. फिर से बुमराह को बुलावा, हो गया इंग्लैंड से छलावा!

और एक बार फिर से कप्तान सूर्या की सही टाइम पर बहुत ही सही कॉल! जसप्रीत बुमराह! स्लॉग ओवरों का पहला यानी 16वां ओवर और बुमराह ने दिए सिर्फ 8 रन. लेकिन असल कमाल अभी बाकी था. तब, जब इंग्लैंड के लिए जरूरी औसत बढ़ रहा था. ऐसे में जस्सी ने 18वें ओवर में दिखाया कि उनके जैसा कोई नहीं! सिर्फ 6 रन. आखिरी दो ओवरों में 14 रन! बुमराह ने महफिल लूट ली थी. और भारत के फाइनल में पहुंचने के लिए कप्तान सूर्यकुमार यादव के इस बड़े फैसले को हमेशा याद किया जाएगा. जस्सी का यही दो ओवर रूपी तड़का था, जिसने तमाम लोगों यहां तक कि संजू सैमसन को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि असली प्लेयर ऑफ द मैच तो जस्सी थे.

5. जीत के बाद पार्टटाइमर को ओवर!

सेमीफाइनल से पहले यह बड़ा सवाल था कि इस मैच में भारत का छठा बॉलर कौन होगा. भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई हुई. वरुण चक्रवर्ती की सबसे ज्यादा, लेकिन इतना भर होने के बावजूद सूर्यकुमार यादव ने जीत सुनिश्चित होने तक छठे बॉलर यानी पार्टटाइमर का इस्तेमाल नहीं ही किया. और जब आखिरी ओवर में इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 30 रन बचे, तब जाकर आखिरी ओवर शिवम दुबे को थमाया, लेकिन इसमें पिटना या कम रन जाने के कोई मायने नहीं थे. मैच का फैसला तो इस ओवर से पहले ही हो चुका था. सूर्यकुमार का यह फैसला भी बड़े निर्णयों में से एक रहा, जिसकी जमकर तारीफ हो रही है. 

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