GT vs RC qualifier 2: वैभव के खिलाफ "बॉडी लाइन" बॉलिंग को लेकर चिंतित हुए पठान, जानें क्या होती है बॉडी लाइन गेंदबाजी, इसका असर

Qualifier-2: क्वालीफायर 2 में गुजरात के पेस अटैक द्वारा वैभव के खिलाफ खास रणनीति गुजराती पेसरों ने अपनाई, तो इरफान पठान सूर्यवंशी को लेकर भावुक हो गए. आप डिटेल से जानें कि बॉडी लाइन बॉलिंग क्या है

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GT vs RR, Qualifier 2: वैभव के हेलमेट पर गेंद लगी, तो सभी चिंतित हो उठे
source: social media

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में शु्क्रवार को मल्लंपुर में खेले गए दूसरे क्वालीफायर मुकाबले में गुजरात कोचिंग स्टॉफ ने वैभव सूर्यवंशी के तूफान को रोकने के लिए बॉडी-लाइन गेंदबाजी की रणनीति बनाई. लेकिन नेहरा जी की यह रणनीति भी कारगर नहीं रही. और छोटे उस्ताद ने 47 गेंदों पर 8 चौकों और 7 छक्कों से 96 रन बनाए. लेकिन एक मौके जब रबाडा की बाउंसर वैभव के हेलमेट पर लगी, तो करोड़ों फैंस उन्हें लेकर चिंतित हो उठे. सिराज ने भी  शुरुआत से  सूयर्वंशी को एकदम शरीर की लाइन में और तीखी बाउंसर फेंकी. लेकिन वैभव ने इसका  बखूबी सामना किया और इस लेफ्टी बल्लेबाज पर इसका ज्यादा असर हुआ नहीं. न ही शुरुआत में और न ही हेलमेट पर गेंद लगने के बाद 

शुरुआत से ही रबाडा और सिराज ने किया अटैक

वैभव को रोकने के लिए गुजरात के दोनों ही पेसरों मोहम्मद सिराज और कैगिसो रबाडा ने सीम और स्विंग के बजाय उनके खिलाफ गति और एकदम शरीर को निशाना बनाकर गेंदबाजी की. दोनों ने शुरुआत में जमकर शॉर्ट पिच और बाउंसर गेंदों का इस्तेमाल किया. एक बार तो ऐसा हुआ कि गेंद टप्पा खाने के बाद विकेटकीपर बल्लेबाज के ऊपर से ही नहीं, बल्कि विकेटकीपर जोस बटलर के ऊपर से गुजरती हुई बाई के चार रन में तब्दील हो गई. यह गेंद अपने आप में सबूत था रबाडा और सिराज किस मनोदशा के साथ मैदान पर उतरे हैं. और पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने शरीर को निशाना बनाते हुए की गई बॉलिंग को ही बॉडी-लाइन गेंदबाजी कहा.  

बॉडीलाइन गेंदबाजी क्या है?

मूल रूप से 'बॉडीलाइन' क्रिकेट इतिहास की एक बेहद विवादित रणनीति है. और इस रणनीति का इस्तेमाल साल1932-33 की एशेज सीरीज में इंग्लैंड के बॉलरों ने महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रेडमैन को रोकने के लिए किया था. इसके तहत कई स्लिप, शॉर्ट-लेग, बैकवर्ड शॉर्ट लेग, शॉर्ट मिड-ऑन, शॉर्ट स्कवॉयर लेग, लेग स्लिप में फील्डर तैनात करते हुए बल्लेबाज पर पूरी तरह से शिकंजा कसना होना था. और गेंदबाज बल्लेबाज के सिर, शरीर को निशाना बनाते हुए शॉर्ट पिच और बाउंसर से हमला करता था.और यह वह युग था, जब इस खेल में हेलमेट का भी इजाद नहीं ही हुआ था. ऐसे में आप कल्पना कर सकते हैं कि खेलने  वाले बल्लेबाज की क्या मनोदशा रहती होगी

व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में गेंदबाज महत्व

बल्लेबाज में घबराहट पैदा करना/ध्यान भंग करना

अब जबकि आईपीएल  में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग एक ओवर में दो बाउंसर फेंकने की इजाजत है, तो इससे गेंदबाज का मकसद दोनों बाउंसरों का इस्तेमाल कर उसके भीतर थोड़ी घबराहट पैदा कर उसके भीतर सुरक्षात्मक नजरिया पैदा करना है. हालांकि, अब इस दौर में नंबर-7  या 8 भी हुक, पुल खेलते हैं, ऐसे में गेंदबाज जब पूरी तरह हेलमेट को निशाना बनाते हैं, तो उनका उद्देश्य गेंद के टप्पे को आगे रखते हुए गति का इस तरह इस्तेमाल करना होता है, जिससे गेंद में गति पूरी बनी रहे, लेकिन उछाल इतनी न हो कि यह वाइड में तब्दील हो जाए. रबाडा ने वैभव के खिलाफ यह रणनीति अपनाई. और वह इसमें सफल रहे, लेकिन सूर्यवंशी इससे विचलित नहीं हुए

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पुल या हुक शॉट खेलने पर मजबूर करना

इस रणनीति का एक पहलू यह है कि गेंद को शॉर्ट रखा जाए. वहीं, साथ ही गति और कंधे का इस्तेमाल इस तरह हो कि ज्यादा तेज उछाल न हो (बटलर के सिर के ऊपर से गई गेंद की तरह) और बल्लेबाज को हुक और पुल शॉट खेलने का पूरा समय मिले, जिसे उसे डीप स्कवॉयर लेग या फाइनल लेग के खड़े फील्डर के हाथों लपकवाया जा सके. लेकिन इससे भी सफलता कम मिलती है क्योंकि टी20 में बाउंड्री तुलनात्कम रूप से  5-6 मीटर बाउंड्री की लंबाई कम होती हैं, तो शॉट ज्यादातर मौकों पर छक्के में तब्दील हो जाते हैं. 


 

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