England V/S Nepal: नेपाल के सबसे बड़े 'बैटिंग बम' दीपेंद्र बस जरा सा चूक गए, इन 2 तूफानी रिकॉर्डों से सभी टीमों में है सिरहन

ICC Men's T20 World Cup 2026: नेपाल जीत से सिर्फ 5 रन दूर रह गया, जिससे पड़ोसी देशवासी बहुत ही गमगीन होंगे, लेकिन अगर दीपेंद्र ऐरी कुछ देर टिक गए होते, तो मैच नेपाल के नाम होता

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ICC Men's T20 World Cup 2026: दीपेंद्र नेपाल के लिए एक मैच विजेता खिलाड़ी हैं
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इंग्लैंड टी20 विश्व कप में रविवार को इतिहास के सबसे बड़े उलटफेर का शिकार होने से बाल-बाल बच गई. नेपाल (Eng vs Nepal) सुपर से ऊपर जीत पान से सिर्फ 5 रन दूर रह गया. क्रिकेट जगत ने दांत तले उंगली दबा ली है. फैंस आपस में बातें कर रहे हैं कि अगर नेपाल बैटिंग के सबसे बड़े बम दीपेंद्र सिंह ऐरी (Dipendra Singh Airee) अगर कुछ देर और पिच पर खड़े रह गए होते, तो अंग्रेजों की बहुत पहले ही छुट्टी हो गई थी. ऑलराउंडर दीपेंद्र एरी ने नंबर चार पर 29 गेदों पर 4 चौकों और 1 छक्के से सबसे ज्यादा 44 रन बनाए. बहरहाल, अगर दीपेंद्र को नेपाल बैटिंग का सबसे बड़ा बम कहा जाता है, तो उसके पीछे वो कारनामे हैं, जिनसे विरोधी टीमें बहुत ही ज्यादा घबराती हैं. 

ऐरी के सुपर से ऊपर कारनामे

दीपेंद्र सिंह ऐरी सितंबर 2023 में मंगोलिया के खिलाफ सिर्फ नौ गेंदों में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे तेज़ अर्धशतक लगाकर सुर्खियों में आए थे. यह अभी भी टी20 वनडे इतिहास का सबसे तेज अर्द्धशतक बना हुआ है.  इसके बाद महज सात महीनों के भीतर वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के लगाने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए. दीपेंद्र ने साल 2024 में यह कारनामा कतर के खिलाफ किया, लेकिन इस कारनामे से वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह कारनामा करने वाले सिर्फ चौथे बल्लेबाज बन गए. उनके अलावा युवराज सिंह, केरोन पोलार्ड और बुल्गारिया का मनन बाशिर ही ऐसा कर सके हैं. देखते ही देखते मिडिल ऑर्डर के पावर‑हिटर, उपयोगी ऑफ‑स्पिनर और शानदार फील्डर ऐरी जल्द ही वनडे और टी20 दोनों ही फॉर्मेट में नेपाल की टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में से एक बन गए. वह पारस खड़का के बाद की पीढ़ी के नेपाल के उभरते सितारों में शामिल रहे. उन्होंने 2016 अंडर‑19 विश्व कप खेलने के बाद 2017 में 17 साल की उम्र में केन्या के खिलाफ सीनियर टीम में पदार्पण किया.

गेंदबाजी में बिखरने लगे जलवा

हालांकि ऐरी ने अपने सीनियर करियर की शुरुआत केवल एक बल्लेबाज़ के रूप में की थी, लेकि उन्होंने अपने पहले 22 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में सिर्फ एक बार गेंदबाज़ी की. साथ ही, वनडे में भी बहुत कम गेंदबाज़ी की, लेकिन कोविड‑19 महामारी के बाद जब नेपाल के मुकाबले फिर शुरू हुए, तो उनकी अनुशासित ऑफ‑स्पिन टीम की रणनीति का अहम हिस्सा बन गई. इसके बाद न सिर्फ ऐरी नियमित रूप से पूरे ओवर फेंकने लगे, बल्कि विकेट लेने की उनकी क्षमता इतनी महत्वपूर्ण साबित हुई कि बल्लेबाज़ी के उतार‑चढ़ाव वाले दौर में भी टीम में उनकी जगह बनी रही.


फील्डिंग में भी चीते जैसी फुर्ती

हालांकि उनकी सबसे बड़ी ताकत शायद उनकी बिजली जैसी फील्डिंग है. चाहे पावरप्ले में इनर रिंग के भीतर हों या डेथ ओवर्स में बाउंड्री पर, ऐरी गेंद को अपनी ओर खींच लेने वाले खिलाड़ी हैं. वह शानदार कैच और हैरान कर देने वाले रन‑आउट करते रहते हैं. ऐरी नेपाल के पहले खिलाड़ी हैं जिन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 1000 रन पूरे किए. साथ ही,  देश के इकलौते खिलाड़ी भी हैं जिनके नाम टी20आई में 1000 से अधिक रन और 50 से ज्यादा विकेट दर्ज हैं.ऐरी का प्रभाव टी20 फॉर्मेट में ज्यादा रहा है. वह वनडे क्रिकेट में 1000 रन का आंकड़ा पार करने वाले नेपाल के पहले पांच बल्लेबाज़ों में भी शामिल हैं
 

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