Destiny vs Karma: इस बडे़ 'कार्मिक प्वाइंट' ने गिल को बना दिया सभी फॉर्मेटों का कप्तान

Shubman Gill's press confrence: यह समय-समय की बात है. एक करीब डेढ़ साल पहले 'गिल का कर्म' दुनिया भर में आग उगल रहा था, लेकिन अब टी20 विश्व कप से बाहर होते ही गिल किस्मत की बातें कर रहे हैं

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जब समय बुरा आता है, तो अक्सर कोई भी शख्स दार्शनिक हो जाता है. उसकी बातें और विचार पूरी तरह से बदल जाते हैं. और टी20 विश्व कप से छुट्टी होने के बाद भारतीय टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) पहली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे की पूर्व संध्या पर इस पहलू पर बोलते दिखाई पड़े, तो इसमें एक बार को वह तार्किक कम और दार्शनिक ज्यादा दिखाई पड़े! गिल ने कहा, "जो मेरी किस्मत में है, उसे कोई नहीं छीन सकता." लेकिन यह तो कर्म या कहें प्रदर्शन ही था, जिसने उन्हें उन्हें एक ही झटके में तीनों फॉर्मेटों का कप्तान बना दिया. हो सकता है कि उनका यह कर्म शायद रोहित शर्मा की किस्मत बन गया हो, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में यह उनका 'असाधारण कर्म' ही था, जिसने तमाम पंडितों कों चौंकाते हुए वह सब दिला दिया, जो बीसीसीआई बहुत ही लंबे समय से ढूंढ रहा था!

यह कर्म इतिहास में अमर हो गया!

पिछले साल रोहित के संन्यास लेने के बाद गिल को टेस्ट कप्तानी मिली, तो यह शुभमन का असाधाण कर्म ही था, जिसके बदौलत उन्होंने 5 टेस्ट की 10 पारियों में 75.40 के औसत से 754 रन बनाकर इतिहास रचा दिया था. इसी 'कार्मिक प्वाइंट' से गिल पांच टेस्ट चार शतक जड़ते हुए अपने करियर को उस प्वाइंट तक पहुंचा दिया, जहां से सारी चर्चाएं, तमाम बहस और  सवाल डस्टबिन में चले गए, लेकिन यही गिल अब प्रेस कॉन्फ्रेंस में किस्मत की बातें कर रहे हैं.!

'इन बने तूफानी रिकॉर्डों' के पीछे भी कर्म ही था!

इंग्लैंड के खिलाफ इस ऐतिहासिक सीरीज में गिल ने सबसे ज्यादा रन बनाए, तो उनके बल्ले से रिकॉर्डों की धारा बह निकली. रिकॉर्डों की प्रदर्शनी सी लग गई. और यह भी किस्मत नहीं, बल्कि कर्म (प्रदर्शन) के चलते ही तो हुआ था. यूं तो गिल ने इस सीरीज में एक से बढ़कर  एक रिकॉर्ड बनाया, लेकिन आप इस दौरे में गिल के बनाए कुछ वेरी-वेरी स्पेशल  रिकॉर्डों पर नजर दौड़ा लें:


1. बतौर भारतीय कप्तान सबसे ज्यादा रन

सबसे ज्यादा रनों की बात अलग है. यहां तो गिल ने महान सुनील गावस्कर को कर्म के बूते पीछे छोड़ दिया. गावस्कर ने साल 1978 में बतौर कप्तान 732 रन बनाए थे, लेकिन गिल ने सीरीज की शुरुआत से आखिर तक कर्म का झंडा बुलंद रखा. और उन्होंने बतौर कप्तान 754 रन बनाकर गावस्कर का नाम अगर पहली पायदान से मिटाया, तो यह किस्मत नहीं, बल्कि कर्म के कारण था. 

2. सीरीज में सबसे ज्यादा शतक

गिल ने इस सीरीज में सबसे ज्यादा चार शतक बनाए. न ही बेन स्टोक्स का स्ट्रोक चला न ही रूट ही इस मामले में कुछ खोद पाए. पूरी सीरीज में कुल 21 शतक बने, लेकिन अगर गिल 4 शतकों से बॉस बने, तो यहां भी उनका कर्म ही प्रधान रहा, यह किस्मत से नहीं आया था. 

3. भारतीय कप्तान का सर्वश्रेष्ठ स्कोर

पहले विराट कोहली ने 254 नाबाद रन बनाए थे, तो सनी गावस्कर (221) और राहुल द्रविड़ (217) ने भी बतौर कप्तान दोहरे शतक जड़े थे लेकिन गिल ने कर्म से किसी भारतीय कप्तान का सर्वश्रेष्ठ स्कोर ही नहीं बनाया, बल्कि यह इंग्लैंड और एशिया के बाहर भी किसी भारतीय कप्तान का सर्वश्रेष्ठ स्कोर था. और यह भी किस्मत से नहीं, कर्म के ही दरवाजे से आया था. 

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