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This Article is From Apr 30, 2017

120 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों ने चुना प्रोग्रेसिव क्लोजर, जानें क्या है यह नियम

120 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों ने चुना प्रोग्रेसिव क्लोजर, जानें क्या है यह नियम
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नई दिल्‍ली: पिछले साल से अब तक 122 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने प्रोग्रेसिव क्लोजर के विकल्प को चुना है. इनमें से अधिकतर कॉलेज महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा में हैं.

अगर कोई कॉलेज किसी शिक्षण वर्ष में प्रोग्रेसिव क्लोजर का विकल्प चुनता है जो उसका तात्पर्य यह है कि वह संस्थान अब छात्रों को प्रवेश नहीं दे सकता. हालांकि इससे पहले के बैच के छात्र पाठ्यक्रम पूरा होने तक पढ़ाई जारी रख सकते हैं.

अखिल भारतीय तकनीकी परिषद को प्राप्त आंकडों के अनुसार 2016-17 में पुणे, नागपुर, औरंगाबाद, जलगांव और कोल्हापुर के 23 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं.
परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आगे चल पाने में विफल निजी इंजीनियरिंग कॉलेज इसे पूरी करह से बंद करने के लिए या तो प्रोग्रेसिव क्लोजर का विकल्प चुनते हैं अथवा इसे पॉलीटेक्निक कॉलेज अथवा  साइंस और आर्ट कालेज में बदल देते है.

उन्होंने कहा कि चूंकि सर्वश्रेष्ठ छात्र आईआईटी, एनआईटी और केन्द्र से सहायता प्राप्त संस्थानों का रख करते हैं बाकी बचे छात्र निजी कॉलेज चले जाते हैं. इसके बाद कम छात्रों वाले संस्थानों को सर्वाइव करना मुश्किल होता है.

इस अवधि में गुजरात में 15, तेलंगाना में सात, कर्नाटक में 11 , उत्तरप्रदेश में 12 , पंजाब में छह, राजस्थान में 11 और हरियाणा में 13 कालेज बंद हो चुके हैं. (एजेंसियों से इनपुट)

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