
नयी दिल्ली:
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे बगैर किसी देरी के छात्रों को डिग्री दिए जाने के नियमों का ‘‘निष्ठापूर्वक’’ पालन करें या ‘‘दंडात्मक कार्रवाई’’ का सामना करें।
यह कदम तब उठाया गया है जब यूजीसी को डिग्रियां दिए जाने में विश्वविद्यालयों की तरफ से की जाने वाली देरी की कई शिकायतें मिलीं ।
कुलपतियों को लिखे पत्र में यूजीसी के सचिव जसपाल एस संधु ने कहा कि नियमों के मुताबिक, छात्रों को उस तारीख से 180 दिनों के भीतर डिग्री दे दी जानी चाहिए जिस तारीख को छात्र के इसके लिए योग्य होने की संभावना हो और वह उसके लिए पात्र हो जाए ।
यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नतीजे जारी होने के दिन के बाद की 180 दिनों की अवधि डिग्री दिए जाने के लिए पर्याप्त समय है और यह किसी विश्वविद्यालय की सबसे बुनियादी और प्राथमिक ड्यूटी है ।
संधु ने कहा कि यह बात समझी जा सकती है कि यदि संस्थान में किसी छात्र ने सफलतापूर्वक पढ़ाई की है, तो किसी भी वजह से उसकी डिग्री रोक कर रखना उसके अवसरों में रोड़े डालने जैसा है ।
यह कदम तब उठाया गया है जब यूजीसी को डिग्रियां दिए जाने में विश्वविद्यालयों की तरफ से की जाने वाली देरी की कई शिकायतें मिलीं ।
कुलपतियों को लिखे पत्र में यूजीसी के सचिव जसपाल एस संधु ने कहा कि नियमों के मुताबिक, छात्रों को उस तारीख से 180 दिनों के भीतर डिग्री दे दी जानी चाहिए जिस तारीख को छात्र के इसके लिए योग्य होने की संभावना हो और वह उसके लिए पात्र हो जाए ।
यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नतीजे जारी होने के दिन के बाद की 180 दिनों की अवधि डिग्री दिए जाने के लिए पर्याप्त समय है और यह किसी विश्वविद्यालय की सबसे बुनियादी और प्राथमिक ड्यूटी है ।
संधु ने कहा कि यह बात समझी जा सकती है कि यदि संस्थान में किसी छात्र ने सफलतापूर्वक पढ़ाई की है, तो किसी भी वजह से उसकी डिग्री रोक कर रखना उसके अवसरों में रोड़े डालने जैसा है ।
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