यह ख़बर 11 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

वोडाफोन : अमेरिका की संस्था ने मनमोहन को लिखा पत्र

खास बातें

  • वोडाफोन का समर्थन करते हुए एक अन्य अमेरिकी संगठन टीईआई ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर विदेश में हुए विलय और अधिग्रहण के ऐसे सौदों को पिछली तिथि से कर के दायरे में लाने के संबंध में संशोधन करने के सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है।
नई दिल्ली:

वोडाफोन का समर्थन करते हुए एक अन्य अमेरिकी संगठन टीईआई ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर विदेश में हुए विलय और अधिग्रहण के ऐसे सौदों को पिछली तिथि से कर के दायरे में लाने के संबंध में संशोधन करने के सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है।

वाशिंगटन के टैक्स एक्जिक्यूटिव इंस्टिट्यूट (टीईआई) ने कहा, ‘सरकार अपनी कर नीतियों में बदलाव करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन निष्पक्षता का तकाजा है कि ऐसे मामलों में बदलाव भावी तिथि से होनी चाहिए।’ इस संस्था का दावा है कि वह विश्व की 3,000 सबसे बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है।

टीईआई ने प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों को भेजे पत्र में कहा कि पिछली तारीख से कर कानून में संशोधन के अधिकार का इस्तेमाल संयम के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा ‘खेद की बात है कि वित्त विधेयक 2012 में उचित संयम का अभाव है, इसके कुछ प्रावधानों के अनुसार भारत के कर कानून में जो बदलाव होगा वह 1962 से प्रभावी होगा।’ यह पत्र बजट में आयकर अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव के संदर्भ में है ताकि वोडाफोन जैसे विदेशी सौदों के मामलों में कर लगाया जा सके जिनमें घरेलू परिसंपत्तियां शामिल हैं।

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इस संशोधन से उच्चतम न्यायालय का वह आदेश निष्प्रभावी हो जाएगा जिसमें उसने 11,000 करोड़ रुपये के कर के मामले में ब्रिटेन की प्रमुख दूरसंचार कंपनी वोडाफोन के पक्ष में फैसला किया था।