खास बातें
- भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने कहा है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद पर वर्तमान अमेरिकी संकट का खास असर नहीं पड़ेगा।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने कहा है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद पर वर्तमान अमेरिकी संकट का खास असर नहीं पड़ेगा। रेड्डी ने कहा कि अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि कुल मिलाकर घरेलू अर्थव्यवस्था पर इसका कैसा असर रहेगा?रेड्डी को 2008 के वित्तीय संकट से पहले घरेलू वित्तीय प्रणाली और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का श्रेय जाता है। इसी वजह से 2008 के वित्तीय संकट से भारत अन्य देशों की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से निपट सका। केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा, हालांकि अमेरिकी संकट का हमारी अर्थव्यवस्था पर कुछ असर होगा, पर यह बहुत गहरा नहीं होगा। हमारी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू खपत पर टिकी है। लघु अवधि में मंदी की आशंका को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका मध्यम अवधि में असर पड़ेगा। रेड्डी ने कहा, 2008 का संकट सभी के लिए चेतावनी था। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स द्वारा अमेरिका की साख घटाए जाने तथा यूरो क्षेत्र के ऋण संकट की वजह से वर्तमान में जो परेशानी आई है, वह इस तथ्य को बताती है कि आधारभूति समस्याओं को अभी तक हल नहीं किया गया है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि अभी स्थिति का सही आकलन लगाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8 प्रतिशत के आसपास रहेगी। हालांकि इसमें कुछ नीचे की ओर आने का रुख बना रहेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका की ऋण साख को ट्रिपल ए से घटाकर एएप्लस किए जाने के बाद अमेरिकी अर्थव्यवस्था में एक और मंदी का दौर आता है, तो वहां से पूंजी का प्रवाह दूसरे देशों को होगा, रेड्डी ने कहा, यदि अमेरिकी प्रणाली में ज्यादा तरलता होती है, तो हमें ज्यादा पूंजी प्रवाह मिल सकता है, यदि गंभीर मंदी रहती है, तो पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव बन सकता है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा, मेरा विचार है कि कुल मिलाकर वर्तमान पूंजी प्रवाह उचित स्तर पर है और इससे चालू खाते के खाते की समस्या से निपटा जा सकता है, तथा इसे जीडीपी के 2.5 प्रतिशत पर लाया जा सकता है। यदि इसमें कुछ गिरावट आती है, तो कुछ समस्या पैदा होगी।