खास बातें
- पूर्व दूरसंचार सचिव डीएस माथुर ने मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि 2जी लाइसेंसों के आवेदनों की प्राप्ति की कट आफ डेट के बाद टाटा समूह ने जीएसएम टेक्नालाजी के लिए आवेदन किया था। माथुर ने कहा कि उन्होंने सभी आवेदनों की तिथिवार पड़ताल करने की वकालत
नई दिल्ली: पूर्व दूरसंचार सचिव डीएस माथुर ने मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि 2जी लाइसेंसों के आवेदनों की प्राप्ति की कट आफ डेट के बाद टाटा समूह ने जीएसएम टेक्नालाजी के लिए आवेदन किया था। माथुर ने कहा कि उन्होंने सभी आवेदनों की तिथिवार पड़ताल करने की वकालत की थी।
अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में अपना बयान देते हुए माथुर ने कहा कि उन्होंने यह ‘मंशा’ जतायी थी कि दूरसंचार विभाग को यूनीफाइड सर्विसेज लाइसेंस (यूएएसएल) प्रदान करने के लिए जो भी आवेदन प्राप्त हुए थे उन पर तिथिवार विचार किया जाये।
आवेदनों पर तिथिवार विचार करने के सिद्धांत की पैरवी करते हुए माथुर ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओ पी सैनी ने कहा, ‘‘यह सही है कि मैंने आवेदनों पर जिस तिथि को वे प्राप्त किए गए, उसके अनुसार तिथिवार ढंग से विचार करने को कहा था।’’ टाटा समूह के दोनों प्रौद्योगिकियों के लिए आये आवेदन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह सही है कि ये दो आवेदन :टाटा टेली सर्विसेज और टाटा टेली सर्विसेज महाराष्ट्र लि. के: एक अक्तूबर 2007 को नये आवेदन की अंतिम तिथि के बाद हासिल किये गये।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह गलत है कि मेरा यह मत था कि दोनों आवेदनों पर अन्य आवेदनों के विचार किये जाने के बाद विचार किया जा सकता है।’’
उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी टेलीकाम परिचालक जो दोनों प्रौद्योगिकियों के लिए आवेदन करता है, उसे स्पेक्ट्रम प्रदान किये जाने में लाभ मिलता है क्योंकि उसे मौजूदा लाइसेंसधारक के रूप में स्पेक्ट्रम मिलता है।
पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील सुशील कुमार द्वारा उनसे जिरह किये जाने पर माथुर ने कहा कि टाटा टेली सर्विसेज और टाटा टेली सर्विसेज महाराष्ट्र लि. ने दोनो प्रौद्योगिकियों के मकसद से सैद्धांतिक मंजूरी के लिए उन्हें दो पत्र लिखे थे। ये पत्र दूरसंचार विभाग को 22 अक्तूबर 2007 को मिले थे।