यह ख़बर 06 नवंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

रियायती सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने का सरकार पर बढ़ा दबाव

खास बातें

  • सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय में इस प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा हुई है कि रियायती सिलेंडरों की संख्या पर पाबंदी हटाई जाए और उसकी जगह उनकी कीमतें बढ़ाने पर विचार किया जाए।
नई दिल्ली:

घरेलू ग्राहकों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या सीमित करने के सवाल पर पेट्रोलियम मंत्रालय पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय में इस प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा हुई है कि रियायती सिलेंडरों की संख्या पर पाबंदी हटाई जाए और उसकी जगह उनकी कीमतें बढ़ाने पर विचार किया जाए।

जानकारी के मुताबिक, रियायती सिलेंडरों की संख्या छह करने से सिर्फ 5300 करोड़ रुपये की बचत होगी जबकि सरकार को इससे होने वाला राजनीतिक नुकसान कहीं बड़ा होगा। ऐसे में इस रकम को बचाने का दूसरा जरिया तलाशा जाना चाहिए।

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कुल रसोई गैस उपभोक्ताओं में से सिर्फ 44 फीसदी परिवार ही ऐसे हैं, जो छह या उससे कम एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं। यदि कुल आंकड़ों की गहराई से पड़ताल की जाए तो कुल उपभोक्ताओं में 29 फीसदी परिवार तो चार या उससे भी कम एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 38 प्रतिशत परिवार पांच या उससे कम। अब, छह से कम सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के इन आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए, तो कुल 14 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं में से 56 फीसदी, यानि, सात करोड़ 84 लाख उपभोक्ताओं पर इस पाबंदी का असर पड़ेगा, और उनकी नाराजगी यूपीए को लोकसभा चुनाव में काफी महंगी पड़ सकती है।

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पेट्रोलियम मंत्रालय पर दबाव ऐसे समय बढ़ रहा है जब प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री सरकारी खर्च में कटौती की वकालत कर रहे हैं। अब देखना होगा की सरकार इस मसले पर आगे क्या फैसला करती है।